लखनऊ। सृष्टि के प्रथम वास्तुकार और निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर गुरुवार को देशभर में हर्षोल्लास और भक्ति का माहौल है। इसी क्रम में भारतीय दोसर वैश्य सामाजिक संस्था उ०प्र० (रजि०) द्वारा राम जानकी गेस्ट हाउस, बुद्देश्वर मे विशेष पूजा-अर्चना और समारोह का आयोजन किया गया। संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकारिणी सदस्यों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने एकजुट होकर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ती पर मलायर्पण कर आरती की एवं पुष्प वर्षा की तथा स्व० श्री श्यामलाल जी गुप्त एवं नेता होरीलाल जी गुप्त की स्मृति को नमन करते हुए श्जय दोसर वैश्य समाजश् और श्जय भारतश् के नारों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष विनोद कुमार गुप्त ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और आर्किटेक्ट माना जाता है। इस दिन मशीनों, औजारों और निर्माण से जुड़े उपकरणों की सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। उन्होंने आगे कहा कि विश्वकर्मा पूजन के दिन कारखानों, दुकानों, कार्यालयों और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों पर स्वस्तिक बनाने का धार्मिक महत्व है। हिंदू धर्म में स्वस्तिक को सबसे पवित्र और शुभ चिन्ह माना गया है।स्वस्तिक शब्द ‘सु’ और ‘अस्ति‘ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है ‘शुभ होना’ या ‘कल्याण होना’। किसी भी शुभ काम की शुरुआत स्वस्तिक बनाकर ही की जाती है।दूसरा कारण समृद्धि से जुड़ा है। स्वस्तिक को धन की देवी लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जहां स्वस्तिक होता है वहां नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। मशीन पर स्वस्तिक बनाने से कारोबार में वृद्धि होती है और आर्थिक समृद्धि आती है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण सुरक्षा है। कारीगर और मजदूर दिन भर मशीनों पर काम करते हैं। मशीन पर स्वस्तिक बनाकर वे अपनी सुरक्षा और मशीन की लंबी उम्र की कामना करते हैं ताकि पूरे साल कोई दुर्घटना न हो।
संस्था के महामंत्री विवेक कुमार गुप्त ने कहा कि विश्वकर्मा दिवस कर्म, कौशल और ईमानदारी की प्रेरणा देता है। कार्यकारिणी सदस्य राम प्रकाश गुप्त पूरे कार्यक्रम दौरान मंच पर एक उद्घोषक के रूप मे उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ष्संघे शक्ति कलि युगेष् के संदेश के साथ समाज की एकजुटता और श्रम का सम्मान ही हमारी वास्तविक शक्ति है।
इस अवसर पर भारतीय दोसर वैश्य सामाजिक संस्था उ०प्र० के प्रमुख कार्यकारिणी सदस्य हरेकृष्ण गुप्त ष्श्यामूष् (बालागंज), राम प्रकाश गुप्त (ठाकुरगंज) आनन्द गुप्त ष्रिंकूष् (बालागंज), राजेश गुप्त (सहादतगंज), अरविन्द कुमार गुप्त (कटरा काकोरी), अशोक गुप्त (यहियागंज), आदि गुप्त (राजाजीपुरम), अनिल कुमार गुप्त ष्पुन्नीष् (रहीमाबाद), लक्ष्मी नारायण गुप्त ष्दीपूष् (सहादतगंज), संजय गुप्त (सुमेरगंज, बाराबंकी), शेखर गुप्त (बुद्धेश्वर), शिव प्रसाद गुप्त (अटेर रहीमाबाद), सुनील कुमार गुप्त ष्जुम्मनष् (रहीमाबाद), डॉ० राकेश कुमार गुप्त (बुद्धेश्वर), ओम प्रकाश गुप्त (राजाजीपुरम) पायल गुप्त (बुद्धेश्वर), अशोक गुप्त (मानक नगर कनौसी), श्याम सुन्दर गुप्त (पाल तिराहा), कृष्ण कुमार गुप्त ष्बब्लूष् (आलमनगर), रमेश चन्द्र गुप्त (सहादतगंज) विकास गुप्त (बालागंज), राम शंकर गुप्त (धनिया महरी पुल), शिव भगवान गुप्त (आलमनगर), कृष्ण गुप्त (फतेहगंज), दिनेश गुप्त (डालीगंज), विमल गुप्त (बंधरा), राजेन्द्र गुप्त (काकोरी मोड़), शिव कुमार गुप्त (आलमनगर), गोपाल गुप्त (काकोरी), बुद्धसेन गुप्त (बादल खेड़ा), सतीश गुप्त ष्एडवोकेटष् (हीवेट रोड), डॉ० महेश गुप्त (भगवान बक्स डिग्री कॉलेज), जितेन्द्र गुप्त (बांगरमऊ),श्रीमती सरिता गुप्ता (कैम्पवेल रोड),श्रीमती रेनू गुप्ता (कैम्पवेल रोड), रीता गुप्ता (गोमतीनगर) एवं कृष्ण मुरारी गुप्त (बालागंज) उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों को प्रसाद वितरित किया गया तथा जलपान की व्यवस्था रही।
