लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों के बेहतर इलाज और अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में आने वाले गंभीर मरीजों की देखरेख और त्वरित इलाज के लिए एक विशेष निगरानी कमेटी का गठन किया गया है।
अब फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी कैजुअल्टी में मरीजों के इलाज की व्यवस्था पर सीधी नजर रखेंगे। यह कर्मचारी एंबुलेंस से मरीज को उतारने, उसे स्ट्रेचर से बेड तक पहुंचाने और बिना देरी इलाज शुरू कराने का पूरा जिम्मा संभालेंगे। इसके अलावा, रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाओं और चिकित्सीय उपकरणों की उपलब्धता की जांच की जाएगी। यदि कोई कमी पाई जाती है, तो उसकी रिपोर्ट प्रतिदिन उच्च अधिकारियों को दी जाएगी ताकि इलाज में कोई बाधा न आए।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में कुल 42 बेड स्वीकृत हैं, जबकि रोजाना यहां 100 से अधिक मरीज गंभीर हालत में पहुंचते हैं। बेड कम होने के कारण अक्सर मरीजों का इलाज स्ट्रेचर पर ही करना पड़ता है। इसी भारी भीड़ और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए प्रबंधन ने यह नई व्यवस्था लागू की है। गंभीर मरीजों को बिना समय गंवाए कैजुअल्टी तक पहुंचाने के लिए अलग से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
इलाज में तेजी लाने और परिजनों की भाग-दौड़ कम करने के लिए सोमवार से कैजुअल्टी गेट के पास ही एक नया पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) काउंटर शुरू होने जा रहा है। अब तक तीमारदारों को पर्चा बनवाने के लिए एमआरआई गेट तक दूर जाना पड़ता था, जिससे काफी समय बर्बाद होता था। नए काउंटर से तीमारदारों को बड़ी राहत मिलेगी और मरीजों का इलाज तुरंत शुरू हो सकेगा।
