पूजा के दौरान सिर ढकना क्यों है जरूरी? जान लें इसका धार्मिक महत्व
September 17, 2026
हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़े कई नियमों में से एक यह भी है कि पूजा के दौरान सिर को ढककर रखना चाहिए। आपके बड़े-बुजुर्गों के द्वारा भी आपको कभी-न-कभी यह सलाह दी गई होगी कि पूजा के दौरान सिर को रुमाल आदि से ढक लें। हालांकि, बहुत कम ही लोग ऐसे होंगे जिन्होंने यह जानने की कोशिश की होगी कि आखिरी सिर को ढकना जरूरी क्यों है। अगर आप भी उनमें से ही एक हैं तो आज हम आपको बताने वाले हैं कि आखिर क्यों पूजा के दौरान सिर को ढका जाता है।
योग और आध्यात्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि सिर के मध्य में ब्रह्मरंध्र होता है जिसे सातवें चक्र के रूप में भी जाना जाता है। इसके जरिए ही सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर में प्रवेश करती है। ऐसे में जब हम पूजा, ध्यान या कोई भी धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तो सकारात्मकता ब्रह्मरंध्र के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करने लगती है, वहीं हमारा सिर अगर ढका हुआ हो तो यह ऊर्जा शरीर के अंदर ही संचित हो जाती है। इसलिए पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, योग आदि के दौरान सिर को ढकने की सलाह दी जाती है।
हिंदू धर्म की मान्यताओं के मतानुसार, पूजा के दौरान सिर को ढककर आप ईश्वर के प्रति आदर और सम्मान प्रकट करते हैं। ऐसा करने से आप अपने अहंकार को सर्वशक्तिमान के सामने त्याग देते हैं और प्रभु की शरण में खुद को समर्पित करते हैं।
मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान सिर ढकने से आपके मन की चंचलता कम होती है और मन एकाग्र अवस्था को प्राप्त करता है। सिर को ढककर रखने से आपका मन भगवान की भक्ति में रमता है। वहीं अगर सिर खुला हुआ हो तो चंचलता आप पर हावी हो सकती है और आपका मन भटक सकता है।
पूजा के दौरान सिर के बाल पूजा सामग्री में न गिरें और पूजा बाधित न हो इसलिए पवित्रता बनाए रखने के लिए भी सिर को ढककर रखना सही माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि बाल नकारात्मकता को जल्दी आकर्षित भी करते हैं इसलिए पूजा के दौरान बालों को ढककर रखना चाहिए वरना नकारात्मक शक्तियां आपको प्रभावित कर सकती हैं।
