पीलीभीत। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में पहले से शादीशुदा युवक द्वारा अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाकर दूसरी शादी करने का मामला सामने आया है। न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव मडरिया निवासी गीता देवी की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने पहली शादी और बच्चे की जानकारी छिपाकर सामूहिक विवाह योजना का लाभ लिया। सबसे गंभीर सवाल योजना के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी उठ रहे हैं कि जिम्मेदार विभागीय स्तर पर जांच के बावजूद मामला पकड़ में क्यों नहीं आया।
गीता देवी के मुताबिक उसकी शादी 24 अप्रैल 2021 को बरेली जिले के थाना क्योलड़िया क्षेत्र के गांव अरविंद के साथ हुई थी। शादी के बाद वह पति के साथ ससुराल में रहने लगी। 26 अगस्त 2022 को उसने बेटे हिमांशु को जन्म दिया। आरोप है कि इसके बाद ससुरालीजन दहेज की मांग को लेकर उसे परेशान करने लगे और बच्चे समेत मारपीट कर घर से निकाल दिया।
पीड़िता ने बताया कि उसने परिवार न्यायालय पीलीभीत में भरण-पोषण का मुकदमा दायर किया था। इसके बाद पति ने समझौता कर उसे अपने साथ रख लिया, लेकिन कुछ समय बाद फिर बच्चे समेत घर से निकाल दिया। इसके बाद गीता ने दहेज और भरण-पोषण को लेकर दूसरा मुकदमा दर्ज कराया, जो अभी न्यायालय में विचाराधीन है
पीड़िता के अनुसार मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने के दौरान उसके पति अरविंद, ससुर जोगराज और सास सुखदेई ने बरखेड़ा क्षेत्र के गांव बर्रामऊ निवासी सुमन देवी, इन्द्रपाल और ओमवती के साथ मिलकर सामूहिक विवाह योजना में पंजीकरण कराने की साजिश रची। आरोप है कि पंजीकरण के दौरान अरविंद ने स्वयं को अविवाहित दर्शाया और गांव प्रधान व सचिव से मिलीभगत कर कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज तैयार कराए गए, जिनके आधार पर उसका आवेदन स्वीकृत हो गया।आरोप के मुताबिक 12 नवंबर 2025 को शहर के ड्रमंड इंटर कॉलेज में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कार्यक्रम में अरविंद ने अपनी पहली शादी और बच्चे की जानकारी छिपाकर सुमन देवी के साथ विवाह कर लिया। पीड़िता का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए शासन से मिलने वाला अनुदान और विवाह सामग्री भी हासिल कर ली गई।
मामले में केवल पति पर ही नहीं, बल्कि सामूहिक विवाह योजना के पंजीकरण और सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि आरोप सही हैं तो पहले से शादीशुदा व्यक्ति का दूसरी शादी के लिए पंजीकरण कैसे हुआ और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान पहली शादी व बच्चे की जानकारी सामने क्यों नहीं आई, यह जांच का अहम बिंदु होगा। पुलिस अब प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है और दस्तावेजों के साथ-साथ योजना के पंजीकरण व सत्यापन से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
