Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

अमेठीः कितनी यादें, कितने कड़े फैसले...आखिर अमेठी से हुई डीएम संजय चौहान की विदाई! तबादले की खबर ने फिर ताजा कर दीं कार्यकाल की यादें, अब कुशीनगर की संभालेंगे कमान


अमेठी। अधिकारी आते हैं, जिम्मेदारी संभालते हैं और फिर एक दिन तबादले के आदेश के साथ नई मंजिल की ओर निकल जाते हैं। मगर कुछ अफसर ऐसे होते हैं, जिनकी विदाई महज प्रशासनिक फेरबदल नहीं रह जाती, बल्कि उनके कामकाज, फैसलों और जनता से जुड़ी यादों का एक अध्याय बन जाती है। अमेठी के जिलाधिकारी संजय चौहान का तबादला भी कुछ ऐसा ही मौका लेकर आया है। शासन की ओर से जारी बड़े प्रशासनिक फेरबदल में संजय चौहान को अमेठी के जिलाधिकारी पद से हटाकर कुशीनगर का जिलाधिकारी बनाया गया है। वहीं शशांक चैधरी को अमेठी का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रदेश में 34 आईएएस अधिकारियों के तबादले के साथ 14 जिलों के जिलाधिकारी भी बदले गए हैं। संजय चौहान का अमेठी कार्यकाल कई मायनों में चर्चा में रहा। जनता की समस्याओं को सुनना, अधिकारियों को जवाबदेह बनाना और शिकायतों पर कार्रवाई के निर्देश देना उनकी प्रशासनिक कार्यशैली का हिस्सा रहा। हाल ही में संग्रामपुर विकासखंड की ठेंगहा ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग कार्य में अनियमितता की शिकायत पर जांच के बाद कार्रवाई की गई। तत्कालीन ग्राम प्रधान को प्रशासक पद से हटाने के साथ 1.61 लाख रुपये से अधिक की वसूली के निर्देश दिए गए। यही वह फैसले हैं, जो किसी अधिकारी के कार्यकाल की तस्वीर बनाते हैं। कहीं सख्ती दिखी तो कहीं फरियाद लेकर पहुंचे लोगों को सुनने की कोशिश हुई। सरकारी योजनाओं की प्रगति से लेकर राजस्व व्यवस्था तक, डीएम की निगरानी में प्रशासनिक स्तर पर लगातार गतिविधियां चलती रहीं। सितंबर में राजस्व व्यवस्था को लेकर छह तहसीलदारों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया था। अब जब संजय चैहान अमेठी से विदा हो रहे हैं तो पीछे छूट रही हैं कई फाइलें, कई फैसले, कई जनसुनवाइयां और अनगिनत मुलाकातों की यादें। सरकारी कुर्सी बदलती है, जिम्मेदारियां बदलती हैं, लेकिन किसी अधिकारी के कार्यकाल में लिए गए फैसले और जनता के बीच बनी छवि लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहते हैं। अमेठी में उनके तबादले की खबर के बाद उनके कार्यकाल को लेकर लोगों के बीच चर्चाएं शुरू हो गई हैं। समर्थक और स्थानीय लोग अपने-अपने अनुभवों के आधार पर उन्हें याद कर रहे हैं। कई लोगों की भावनाओं में एक ही बात सुनाई दे रही हैकृ“साहब चले गए, लेकिन उनकी यादें अमेठी में रह गईं। हालांकि प्रशासनिक सेवा में तबादला व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है। संजय चैहान अब कुशीनगर की जिम्मेदारी संभालेंगे और अमेठी को नया जिलाधिकारी मिलेगा। कुर्सी बदली है, सफर बदला है... लेकिन अमेठी में संजय चैहान के कार्यकाल का अध्याय अब यादों के पन्नों में दर्ज हो चुका है। आने वाले समय में लोग उनके फैसलों को अपने-अपने अनुभवों के आईने से याद करेंगे। अमेठी ने एक डीएम को विदा किया है, मगर उनके कार्यकाल की चर्चाएं अभी इतनी जल्दी खत्म होने वाली नहीं हैं।

फैसले ऐसे, जिनकी गूंज दफ्तरों से निकलकर गांवों तक पहुंची

संजय चैहान के कार्यकाल की सबसे खास बात उनके प्रशासनिक फैसलों को लेकर रही। जिलाधिकारी की कुर्सी संभालने के बाद उन्होंने केवल बैठकों और सरकारी फाइलों तक प्रशासन को सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं की निगरानी पर जोर दिया। अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो कई मामलों में लापरवाही और अनियमितता पर कार्रवाई भी सामने आई। जनसुनवाई के दौरान फरियादियों की समस्याएं सुनने से लेकर संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश देने तक, प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय रखने की कोशिश दिखाई दी। शिकायतें केवल दर्ज होकर फाइलों में दब न जाएं, बल्कि उनका निस्तारण धरातल पर दिखाई देकृइस पर जोर रहा। जहां जरूरत पड़ी, वहां सख्ती भी दिखाई गई। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गुणवत्ता, सरकारी धन के इस्तेमाल और शिकायतों से जुड़े मामलों में जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई हुई। ठेंगहा ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग कार्य से जुड़ी अनियमितता के मामले में कार्रवाई और वसूली के निर्देश इसी प्रशासनिक सख्ती की एक मिसाल रहे। इन फैसलों का असर केवल संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा। संदेश यह गया कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जवाबदेही तय हो सकती है। यही वजह रही कि संजय चैहान के कार्यकाल में “फाइल पर आदेश” के साथ जमीन पर असर की चर्चा भी होती रही। उनकी कार्यशैली का दूसरा पहलू थाकृजनता और प्रशासन के बीच संवाद। फरियादी अपनी बात सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकें, समस्याओं का समाधान समय से हो और विभागीय स्तर पर लापरवाही पर नजर रखी जाए, इसके लिए लगातार समीक्षा और निरीक्षण का सिलसिला चलता रहा।  बेशक हर प्रशासनिक फैसले का असर एक जैसा नहीं होता और हर व्यक्ति का अनुभव भी अलग हो सकता है। लेकिन इतना जरूर है कि संजय चैहान के कार्यकाल के फैसलों ने अमेठी के प्रशासनिक माहौल में अपनी एक अलग छाप छोड़ी। कई फैसले चर्चा में आए, कई फैसलों पर सवाल भी उठे, लेकिन प्रशासनिक सक्रियता और निर्णय लेने की शैली उनके कार्यकाल की पहचान बन गई। अब जब संजय चैहान अमेठी से विदा हो रहे हैं, तो पीछे सिर्फ सरकारी आदेश और फाइलें नहीं छूट रही हैं। उनके कार्यकाल के फैसलों से जुड़े अनुभव, जनसुनवाइयों की यादें और प्रशासनिक सख्ती की चर्चाएं भी लोगों के बीच रह गई हैं। कुर्सी बदल गई, अधिकारी बदल गए, लेकिन फैसलों की छाप वक्त के साथ ही मिटेगी,ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |