संग्रामपुर/अमेठी। शासन की ओर से ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आयोजित किए जाने वाले ब्लॉक दिवस की व्यवस्था अमेठी तहसील क्षेत्र में सवालों के घेरे में है। महीनेे के प्रथम बुधवार को ब्लॉक दिवस आयोजित किए जाने के निर्देश के बावजूद बुधवार को संग्रामपुर ब्लॉक मुख्यालय पर इसका आयोजन नहीं हुआ। बीडीओ की कुर्सी खाली पड़ी रही और फरियाद लेकर पहुंचे लोगों को जिम्मेदार अधिकारी का इंतजार करना पड़ा। ब्लॉक दिवस में अधिकारियों के नदारद रहने की खबरें लगातार प्रकाशित होती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। बुधवार को संग्रामपुर ब्लॉक मुख्यालय का नजारा भी कुछ ऐसा ही रहा। कार्यालय का दरवाजा खुला था, बीडीओ की कुर्सी भी मौजूद थी, लेकिन उस पर बैठने वाला अधिकारी नजर नहीं आया। ऐसे में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर किसके सामने फरियाद करें, यह बड़ा सवाल बना रहा। ग्रामीणों का कहना है कि ब्लॉक दिवस का उद्देश्य ही गांव-गांव से आने वाले लोगों की समस्याओं को एक ही स्थान पर सुनना और उनका समाधान कराना है। इसके साथ ही केंद्र व प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी ग्रामीणों तक पहुंचाई जानी होती है। लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही मौके पर मौजूद न हों तो शासन की यह महत्वपूर्ण व्यवस्था महज औपचारिकता बनकर रह जाती है। बताया जाता है कि शासन के निर्देशानुसार ब्लॉक दिवस में ग्रामीणों की शिकायतें सुनी जाती हैं और संबंधित विभागों के अधिकारियों के माध्यम से समस्याओं के निस्तारण का प्रयास किया जाता है। लेकिन संग्रामपुर में बुधवार को जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति ने पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए। संग्रामपुर ही नहीं, भेंटुआ और भादर ब्लॉक में भी ब्लॉक दिवस के आयोजन को लेकर ऐसी ही स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। इससे साफ है कि ग्रामीण समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी है। अब सवाल यह है कि जब ब्लॉक दिवस के दिन ही खंड विकास अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं होंगे तो गांव से आने वाला फरियादी अपनी शिकायत किसके सामने रखेगा? क्या ब्लॉक दिवस केवल सरकारी कागजों में आयोजित होकर खानापूर्ति तक सीमित रह गया है? लगातार उठ रहे इन सवालों के बीच अब ग्रामीणों को उच्चाधिकारियों से कार्रवाई और नियमित ब्लॉक दिवस की व्यवस्था बहाल होने की उम्मीद है।
शासन के फरमान पर भारी अफसरों की मनमानी, समस्या लेकर पहुंचे ग्रामीणों को नहीं मिला कोई सुनने वाला
