आदर्श प्रताप सिंह
जायस/अमेठी। प्रदेश सरकार जहां विद्यार्थियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था और आमजन को निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जायस क्षेत्र में इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। जायस पावर हाउस से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों शाम होते ही नियमित रूप से बिजली रोस्टिंग शुरू हो जाती है, जिससे आम जनमानस के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्या ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों को पढ़ाई से पीछा छुड़वा रही सरकार ?
शाम होते ही बिजली गुल होना विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई से बचने का एक और बहाना बन रहा है सवाल यह भी है कि क्या ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के घर में इनवर्टर की सुविधा उपलब्ध है? ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो महंगे इनवर्टर और बैटरी का खर्च वहन नहीं कर सकते। ऐसे में जब शाम होते ही बिजली चली जाती है तो बच्चों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित होती है। वैसे भी ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान बहुत कम देखने को मिलता है और बिजली कटौती उन्हें पढ़ाई से बचने का एक और बहाना दे देती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम का समय बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसी समय बिजली की रोस्टिंग शुरू होने से उनकी पढ़ाई चौपट हो रही है। परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं बिजली कटौती के दौरान गर्मी और उमस से भी लोगों का हाल बेहाल है। घरेलू कामकाज से लेकर छोटे दुकानदारों के कारोबार तक पर इसका असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बिल की वसूली में विभाग पूरी सख्ती दिखाता है, लेकिन नियमित आपूर्ति के नाम पर उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है । हालांकि अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कुछ बदलाव होगा या यूं ही चलती रहेगी रोस्टिंग ग्रामीणों का कहना है कि यदि ये रोस्टिंग यूं ही चलती रही तो इसका फर्क आगमों विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है ।
