प्रतापगढ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां एक तरफ सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के लिए एंटी-भूमाफिया टास्क फोर्स चला रही है, वहीं प्रतापगढ़ के कोहंडौर थाना क्षेत्र में इस मुहिम को स्थानीय सिस्टम ही पलीता लगा रहा है। रक्षक ही भक्षक बन बैठा है। कोहंडौर थाना क्षेत्र के तिवारीपुर खुर्द गांव से सरकारी जमीन को निगलने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राजस्व विभाग की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जमीन की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला हल्का लेखपाल राजेश कुमार ही भू-माफियाओं का श्कमाऊ पूतश् बनकर सरकारी संपत्ति की खुलेआम सौदेबाजी करवा रहा है।सरकारी जमीन पर दबंगई से कब्जा किया जा रहा है, लेखपाल मलाई काट रहा है, उक्त मामला ग्राम सभा की कीमती श्नवीन परतीश् भूमि से जुड़ा है। जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को दिए गए एक शिकायती पत्र में गांव के पीड़ित अमरनाथ तिवारी ने इस पूरे नेक्सस (गठजोड़) को बेनकाब किया है। आरोप के मुताबिक, गांव की गाटा संख्या 47 (रकबा 0.115 हेक्टेयर) की सरकारी जमीन पर इलाके के रसूखदार भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है। इस पर कार्रवाई करने के बजाय हल्का लेखपाल राजेश कुमार इन दबंगों का श्अघोषित संरक्षकश् बना हुआ है और इस अवैध संरक्षण के बदले हर महीने मोटी अवैध वसूली (रिश्वत) की मलाई काट रहा है। प्रार्थी का कहना है कि बड़े अफसरों की आंखों में झोंकी जा रही धूल। हैरानी की बात यह है कि यूपी राजस्व संहिता 2006 की धारा 67(1) के तहत भू-माफियाओं के खिलाफ बेदखली की कागजी रिपोर्ट बहुत पहले भेजी जा चुकी थी। लेकिन साल 2023 से लेकर अब तक, फाइल को ठंडे बस्ते में दबाकर रखा गया है। शिकायती पत्र में सीधा आरोप है कि जब भी उच्च अधिकारी इस संबंध में जवाब मांगते हैं, तो यह भ्रष्ट लेखपाल अपनी चैकड़ी को बचाने के लिए मनगढ़ंत और झूठी रिपोर्ट तैयार कर बड़े अफसरों की आंखों में धूल झोंक देता है।
जिलाधिकारी से प्रार्थी ने श्लेखपाल को जेल भेजन व मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।स्थानीय स्तर पर साठगांठ से तंग आकर अब पीड़ित ने सीधे जिलाधिकारी के दरबार में गुहार लगाते हुए भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा प्रहार करने की मांग की है कि सरकारी जमीन (गाटा संख्या 47) से भू-माफियाओं का अवैध कब्जा तुरंत हटाकर इसे ग्राम सभा को सौंपा जाए। भू-माफियाओं के साथ मिलकर सरकार को चूना लगाने वाले आरोपी लेखपाल राजेश कुमार को तत्काल इस हल्के से हटाकर सस्पेंड किए जाने की मांग की।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, जालसाजी करने और भ्रष्टाचार के संगीन आरोपों में लेखपाल और भू-माफियाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर इन्हें सलाखों के पीछे भेजने तक की मांग की गई है।अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के श्जीरो टॉलरेंसश् के दावों के बीच, प्रतापगढ़ जिला प्रशासन इस भ्रष्ट लेखपाल-भूमाफिया सिंडिकेट पर हंटर चलाता है, या फिर सरकारी जमीन पर डकैती का यह खेल ऐसे ही बदस्तूर जारी रहेगा।
