प्रतापगढ़। सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लासिकल तमिल चेन्नई तमिलनाडु में आयोजित सात दिवसीय तिरुक्कुरल अनुवाद कार्यशाला में तमिल महाकाव्य शिलाप्पधिकारम के श्रेष्ठ अनुवाद एवं जानकरीपरक व्याख्यान के लिए जनपद के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. दयाराम मौर्य श्रत्नश् को संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आर. चन्द्रशेखरन ने स्मृति चिन्ह और सम्मान पत्र भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर तमिल-हिन्दी-अवधी विद्वान डॉ. एम. गोविन्द राजन, आर्मीनिया देश भाषाविद श्रीमती नायरा, समन्वयक डॉ. अलागुमुथू भी उपस्थित रहे।
डॉ.दयाराम मौर्य श्रत्न के अवधी अनुवाद का पुनरावलोकन करने वाले विद्वानो ने बहुत सराहना की। डॉ.दयाराम मौर्य श्रत्नश् के श्रेष्ठ अनुवाद के गुण, भाषा का स्वभाव तथा भाषा मानव एकता में सहायक इत्यादि विषयों पर हिन्दी-अंग्रेजी में दिए गए व्याख्यान को उत्कृष्ट बताया। सभी अनुवादकों को कार्यशाला की अवधि में दो दिन तमिलनाडु के धार्मिक, पौराणिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों का भ्रमण कराकर वहॉं की समृद्ध विरासत से परिचित कराया गया।
सम्मान और कार्यशाला की उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए एलायंस क्लब इन्टरनेशनल के निदेशक रोशनलाल ऊमरवैश्य, आनन्द मोहन ओझा, राजीव कुमार आर्य, राधेश्याम दीवाना, श्रीनाथ मौर्य सरस, कुंज बिहारी लाल मौर्य काकाश्री, प्रेम कुमार त्रिपाठी प्रेम, अनिल कुमार निलय, राकेश कनौजिया और स्वतन्त्र कवि मंडल सांगीपुर के अध्यक्ष अर्जुन सिंह ने डॉ.दयाराम मौर्य रत्न को बधाई और शुभकामना दी है।
