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सुल्तानपुरः बारिश ने खोली आवास योजना की पोल, दो कच्चे मकान ढहेकृगरीब परिवारों के सामने छत और निवाले का संकट


लम्भुआ/सुल्तानपुर। दो दिन की बारिश ने लम्भुआ ब्लॉक क्षेत्र के भरखरे गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी। बारिश के दौरान दो कच्चे मकान ढह गए, जबकि दो अन्य मकानों की दीवारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। मकान गिरने से प्रभावित परिवारों के सामने अब सिर छिपाने के साथ-साथ गृहस्थी और भोजन का संकट खड़ा हो गया है। सरकार लगातार दावा करती रही है कि प्रदेश के हर पात्र गरीब परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन भरखरे गांव की तस्वीरें इस दावे पर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि हर पात्र गरीब को आवास मिल चुका है तो बारिश में कच्चे मकान गिरने वाले इन परिवारों की बारी आखिर कब आएगी गांव की एक महिला ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि आवास योजना का लाभ कई बार वास्तविक जरूरतमंदों के बजाय प्रभावशाली लोगों तक पहुंच जाता है। महिला ने सिफारिश और कथित लेन-देन के आरोप भी लगाए, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है मामला सामने आने के बाद सवाल यह भी है कि क्या संबंधित विभाग ने इन परिवारों का सर्वे कराया था? यदि परिवार पात्र थे तो उन्हें आवास क्यों नहीं मिला और यदि अपात्र थे तो किस आधार पर? बारिश में मकान ढहने के बाद क्या प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत और सुरक्षित आवास की व्यवस्था की भरखरे गांव के गरीब परिवारों की टूटी दीवारें अब आवास योजना की पात्रता, सर्वे और लाभार्थी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

साठ वर्षीय विधवा कलावती अपने पेंशन के भरोसे अपना जीवन यापन करती थी अब उनके सामने विपद आगे है रहने की व्यवस्था करें या खाने की क्या ए आवास योजना की पात्र नहीं थी यदि थी तो मिला क्यों नहीं क्या किसी घटना का इंतजार था दूसरे दिन की बरसात मे अमरनाथ की कच्ची दीवाल गिर गई जिसकी वजह से जान माल तो नहीं हुआ लेकिन बगल के विनोद की पक्की दीवाल टूट गई घटना बड़ी हो जाती क्यूंकि विनोद की विटिया उसी मकान मे सो रही थी वही गांव निवासी कुटुरा देवी 75 वर्षीय अपना जीवको पार्जन एक कच्ची दीवाल के पास टिका कर करती थी बारिस मे वो भी ढह गया जिससे वही इसी गाँव के गोकुल पुत्र सुखराम और दिनेश पेंटर सुरेश और रमेश पुत्र दरगाही का भी भारी नुकसान हो गया काफी लोग अपना कच्चा मकान छोड़कर पन्नी के नीचे रहने के लिए मजबूर है और सरकार कहती है की सभी को आवास मिल चूका है सही क्या है जरूरतमंदों को आवास कब मिलेगा और जिम्मेदार अधिकारी इन परिवारों की सुध कब लेंगे, इसका जवाब अब प्रशासन को देना होगा।

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