Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

प्रतापगढः मत कहो राष्ट्र भाषा मै हिन्दी हूँ मुझे हिन्दी ही रहने दो - हरिवंश शुक्ल


प्रतापगढ़। क्षेत्र के काछा गाँव में  हिंदी पखवारा के अंतर्गत राष्ट्रभाषा हिंदी के उन्नयन हेतु  साहित्यिक संस्था कवि कुल द्वारा एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें साहित्यकारों ने हिंदी भाषा के उत्थान के लिए अपनेऋ अपने विचार व्यक्त किए । गोष्ठी की शुरुआत माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण से किया गया ।  उसके बाद हरिवंश शुक्ल ष्शौर्यष्  ने हिंदी पर आधारित अपनी रचना मत कहो राष्ट्रभाषा,  मैं हिंदी हूँ मुझे हिंदी रहने दो  जिसे लोगों ने सराहा। उसके बाद अनूप त्रिपाठी ने हिंदी पर आधारित अपनी रचना से हिंदी  हमारी शान है , हिंदी हमारी पहचान है ..से हिंदी भाषा को सर्वोपरि बताया । मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रताप पहरी के संपादक सुरेश संभव ने हिंदी भाषा को सभी भाषाओं की जननी बताते तथा अपनी रचना से किसी राष्ट्र की राष्ट्र  भाषा  राष्ट्र गान के समान है.. से  हिंदी भाषा को गौरव की भाषा बताया। विशिष्ट तिथि सरनाम सिंह ने कवियों को हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनने पर जोर देने की अपील की । सुरेश दुबे व्योम  ने  हिंदी पर आधारित अपनी रचना से मंच को ऊँचाई दी। चंद्र शेखर शुक्ल विकास ने हास्य की रचना आशिक माफिक हो तो मरना कबूल है, आशिक बेवफा हो तो मरना फिजूल है से आज की मोहब्बत पर तंज कसा।  मिठाई लाल ने अपनी कविता ष्हिंदी हमारी भाषा है यह हमारी अभिलाषा हैष् को लोगों ने सराहा। अध्यक्षता डॉ अरुण कुमार रत्नाकर संचालन आशुतोष गिरी ष्दीपकष् ने किया । स्वागत आयोजक सुरेश दुबे व्योम  व आभार प्रदर्शन संयोजक संजय शुक्ल  ने किया। इस अवसर पर प्राण नाथ यादव, प्रखर शुक्ल, सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |