लखनऊ। राजधानी के नगर निगम जोन 07 अंतर्गत चिनहट स्थित रहमानपुर गांव में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी है। श्मिशन क्लीनश् और श्स्वच्छ भारत अभियानश् के तहत करोड़ों के बजट का दावा करने वाला नगर निगम प्रशासन जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। क्षेत्र में महीनों से न तो सफाई कर्मचारियों की झाड़ू पहुंची है और न ही नालियों का सिल्ट साफ कराया गया है। नतीजतन, बजबजाती नालियों का गंदा पानी अब सड़कों पर बहकर स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार कर रहा है।
क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि समस्या से तंग आकर जब उन्होंने नगर निगम के सुपरवाइजर से गुहार लगाई, तो समाधान मिलना तो दूर, उल्टा उन्हें ही धमकी दे दी गई। निवासियों का कहना है कि सुपरवाइजर ने न सिर्फ सफाई कराने से साफ इंकार किया, बल्कि अंजाम भुगतने की भी चेतावनी दी। वहीं, दूसरी ओर जनता के वोटों से चुनकर आए क्षेत्रीय पार्षद ने भी इस पूरे प्रकरण से आंखें मूंद रखी हैं। अफसरशाही की बदमिजाजी और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी ने जनआक्रोश को और हवा दे दी है।
प्रशासन की इस अकर्मण्यता से तंग आकर आखिरकार एक स्थानीय निवासी को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। हाथ में छड़ और डंडा लेकर नालियों में फंसा कूड़ा साफ करते उस नागरिक की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। यह तस्वीर लखनऊ नगर निगम के बड़े-बड़े दावों, कागजी स्वच्छता अभियानों और वीआईपी व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा है।
रहमानपुर में फैली इस गंदगी और वायरल वीडियो ने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बड़ा सवाल यह है कि जनता जब अपने टैक्स के पैसे से नगर निगम का खजाना भरती है, तो बदले में उसे खुद नालियां साफ क्यों करनी पड़ रही हैं? क्या जिम्मेदार सुपरवाइजर पर कोई कठोर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबा दिया जाएगा? फिलहाल, रहमानपुर की यह घटना इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि जब व्यवस्था सो जाती है, तो आम नागरिक को अपने हक और सेहत के लिए खुद ही सड़क पर उतरना पड़ता है।
