Type Here to Get Search Results !
BREAKING NEWS
ऑनलाइन भुगतान करें
Pay Now

पितृ पक्ष में नहीं खरीदनी चाहिए ये चीजें, वरना छिन सकती है घर की सुख-शांति


27 सितंबर 2026 से पितृ पक्ष आरंभ हो चुका है। पितृ पक्ष पितरों को समर्पित होता है। इस दौरान पूर्वजों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है। पितरों का पूजन और श्राद्ध कर्म करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। जिस व्यक्ति से उनके पूर्वज प्रसन्न होते हैं उन्हें कभी पितृ दोष का सामना नहीं करना पड़ता है। आपको बता दें कि पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं घर में भी क्लेश और अशांति का माहौल बना रहता है। शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में पितरों का स्मरण और पूजन करना चाहिए। इस समय जितना संभव हो सात्विक और सादा जीवन बिताना चाहिए। पितृ पक्ष में नई चीजों की खरीददारी करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि पितृ पक्ष में इन चीजों को खरीदने से जीवन में नकारात्मकता बढ़ सकती है और दोष भी लग सकता है।
पितृ पक्ष में क्या नहीं खरीदना चाहिए?

  • पितृ पक्ष में नए कपड़े नहीं खरीदना अशुभ माना जाता है। तो इस समय नए कपड़े नहीं खरीदें।
  • पितृ पक्ष में सोने-चांदी या अन्य आभूषण की भी खरीददारी नहीं करनी चाहिए। वरना आपकी घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है।
  • पितृ पक्ष में नया झाड़ू खरीदने की भी मनाही होती है। ऐसा करने से आपके घर की बरकत रुक सकती है।
  • पितृ पक्ष में नए वाहन की खरीददारी बिल्कुल भी नहीं करें। इसके साथ ही नई जमीन, दुकान और घर खरीदना भी वर्जित माना गया है।
  • पितृ पक्ष के दौरान लोहा या लोहे से बनी हुई चीजों की खरीददारी भी नहीं करें। इस समय में लोहा खरीदने से जीवन में परेशानियों बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।
  • पितृ पक्ष के समय नमक और सरसों तेल खरीदने से भी बचना चाहिए। कहते हैं कि इन चीजों को श्राद्ध पक्ष में घर लाने से मानसिक शांति भंग हो सकती है।
पितृ पक्ष 2026 कब समाप्त होगा?

इस साल पितृ पक्ष 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त होगा। इस दिन सर्वपितृ अमावस्या रहेगी। पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का आरंभ 9 अक्टूबर को रात 10 बजकर 35 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 10 अक्टूबर को रात 9 बजकर 19 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि और चतुर्दशी तिथि को हुई हो। यदि कोई संपूर्ण तिथियों पर श्राद्ध करने में सक्षम न हो तो वो मात्र अमावस्या तिथि पर सभी के लिए श्राद्ध कर सकता है। अमावस्या तिथि पर किया गया श्राद्ध सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करने के लिये पर्याप्त है। जिन पूर्वजों की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है उनका श्राद्ध भी अमावस्या तिथि पर किया जा सकता है। इसीलिए अमावस्या श्राद्ध को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Design by - Blogger Templates |