हैंडओवर के बाद भी कर्मचारियों को नहीं मिला आवास, 20-25 परिवारों के रहने की क्षमता वाले भवन में यादव परिवार के रहने का दावा
बलिया। फेफना विधानसभा क्षेत्र के दुमदुमा गांव में करीब छह करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय के स्टाफ आवास पर निजी व्यक्ति के कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि कार्यदायी संस्था द्वारा भवन को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग को हैंडओवर किए जाने के बावजूद शिक्षक और कर्मचारियों को आवास आवंटित नहीं किया गया है। वहीं, तीन मंजिला सरकारी आवास में एक यादव परिवार के रहने की बात कही जा रही है। इससे सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल और विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दुमदुमा गांव में पंचायत भवन के पास शासन की ओर से समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय, छात्रावास, स्टाफ आवास और छात्रावास अधीक्षक आवास का निर्माण कराया गया है। करीब छह करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का निर्माण कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस) ने किया है। भवन वर्ष 2026 में संबंधित विभाग को हैंडओवर किए जाने की बात कही गई है। तीन मंजिला स्टाफ आवास में करीब 20 से 25 कर्मचारियों के परिवारों के रहने की व्यवस्था है।
इसके बावजूद वर्तमान में तैनात शिक्षक और कर्मचारियों को आवास का लाभ नहीं मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विद्यालय में फिलहाल दो शिक्षक और पांच अन्य कर्मचारी तैनात हैं। आरोप है कि इनमें से कोई भी सरकारी आवास में नहीं रहता। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भवन विभाग को हैंडओवर हो चुका है तो पात्र शिक्षक और कर्मचारियों को आवास आवंटित क्यों नहीं किया गया?
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि नवनिर्मित सरकारी आवास में एक यादव परिवार रह रहा है और भवन के साथ बिजली आदि सुविधाओं का भी उपयोग कर रहा है। विभागीय अधिकारी की ओर से बताया गया है कि कार्यदायी संस्था के ठेकेदार ने भवन की देखरेख के लिए एक व्यक्ति को वहां रखा था और वही अभी भी देखरेख के लिए रह रहा है। हालांकि, सरकारी भवन में किसी निजी व्यक्ति के लंबे समय तक रहने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दुमदुमा में दिव्यांग छात्र-छात्राओं की शिक्षा के लिए समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय संचालित है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से यहां कक्षा छह से 12वीं तक पढ़ाई शुरू की गई है। विद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों के कुल 25 पदों का मानक बताया गया है, जबकि वर्तमान में दो शिक्षक और पांच अन्य कर्मचारी ही तैनात हैं। शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालय की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
दिव्यांग छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विद्यालय परिसर में छात्रावास का भी निर्माण कराया गया है। इसमें 50 छात्र और 50 छात्राओं के रहने की व्यवस्था है। बावजूद इसके छात्रावास अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इससे दूर-दराज से आने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विद्यालय में तैनात शिक्षक और कर्मचारी आवास आवंटन नहीं होने के कारण स्कूल परिसर में रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं। एक तरफ करोड़ों रुपये खर्च कर कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन तैयार है, दूसरी तरफ उसका उपयोग पात्र कर्मचारियों के लिए नहीं हो पा रहा है। ऐसे में भवन निर्माण के उद्देश्य और उसके उपयोग के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
सरकारी भवनों के निर्माण के बावजूद विद्यालय, छात्रावास और आवास तक पहुंचने के लिए समुचित मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई है। परिसर तक जाने वाला रास्ता अभी भी कच्चा है और जगह-जगह घास-फूस उग आई है। इसी रास्ते से ग्रामीणों का भी आवागमन होता है। करोड़ों की परियोजना तक पक्की सड़क नहीं पहुंचने से विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी को गाजीपुर से बलिया में सोमवार, मंगलवार और बुधवार के लिए संबद्ध किया गया है। आरोप है कि अधिकारी की नियमित उपलब्धता नहीं होने से दिव्यांगजन अपनी समस्याएं लेकर कार्यालय पहुंचने के बाद भी इंतजार करते रहते हैं और कई बार निराश होकर लौट जाते हैं। हालांकि, इस संबंध में विभागीय अधिकारी का पक्ष अलग है।
“स्टाफ आवास में कार्यदायी संस्था के ठेकेदार की ओर से देखरेख के लिए एक यादव को रखा गया था। वह अभी भी भवन की देखरेख के लिए वहां रह रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण आवास का आवंटन नहीं हो पा रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति निदेशालय स्तर से होती है। इसके लिए विभाग की ओर से पत्राचार किया गया है। वर्तमान में विद्यालय में दो शिक्षक और पांच अन्य कर्मचारी तैनात हैं- पारस नाथ यादव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, बलिया
