एंटीलिया बम केस में सचिन वाजे को कल ही मिली थी जमानत, आज बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई अस्थाई रोक
September 30, 2026
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एंटीलिया केस में आरोपी पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाजे को जमानत देने के ऑर्डर पर अस्थाई रोक लगा दी है। इस केस में अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। एंटीलिया मामले आरोपी सचिन वाजे को कल सेशन कोर्ट ने जमानत दे दी थी। इस आदेश को चैलेंज करते हुए NIA ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब हाई कोर्ट ने इस आदेश को टेम्परेरी स्टे दिया है। NIA की अर्जेंट याचिका के बाद बॉम्बे HC ने सचिन वाजे की जमानत पर 7 अक्टूबर तक रोक लगा दी है।
NIA ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए स्पेशल NIA कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें सचिन वाज़े को जमानत दी गई थी। एजेंसी ने जमानत के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, जस्टिस सारंग कोतवाल ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया और याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद NIA ने याचिका जस्टिस भारती डांगरे की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष पेश की। बुधवार को मामला जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की बेंच के सामने सूचीबद्ध हुआ। हालांकि, इस बेंच ने भी मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस आशीष चव्हाण पहले CBI के वकील के रूप में पेश हो चुके हैं, जबकि जस्टिस भारती डांगरे ने सचिन वाज़े से जुड़े अन्य मामलों में राजनीतिक नेताओं से संबंधित याचिकाओं पर पहले सुनवाई की थी।
इसके बाद NIA ने तुरंत मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मामला पेश किया और तत्काल निर्देश देने की मांग की। मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बाद यह मामला जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच को सौंपा गया। दोपहर में मामले पर सुनवाई हुई। हालांकि, सचिन वाजे की ओर से अदालत में कोई वकील पेश नहीं हुआ। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सचिन वाजे की जमानत पर 7 अक्टूबर तक अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने यह आदेश तत्काल जेल प्रशासन को भेजने का भी निर्देश दिया, जिससे वाजे को जमानत पर रिहा होने से रोका जा सके।
आपको बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने सचिन वाजे को मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के पास एक एसयूवी से विस्फोटक सामग्री बरामद होने और व्यवसायी मनसुख हिरेन की मौत के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। इसके बाद मुंबई पुलिस ने सचिन वाजे को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इस मामले ने पूरे देश को हैरान कर के रख दिया था और महाराष्ट्र में इसे लेकर काफी राजनीतिक बवाल भी देखने को मिला था।
