लखनऊ। राजधानी के प्रसिद्ध बलरामपुर अस्पताल की संवेदनशीलता और समर्पित देखभाल से एक परिवार में फिर से खुशियां लौट आई हैं। मानसिक रोग से ग्रसित एक महिला, जो पिछले 7 महीनों से अपने घर से लापता थी, बलरामपुर अस्पताल में इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर सुरक्षित अपने परिजनों के पास पहुंच गई है।
महिला मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी और 19 फरवरी 2026 को अपने घर से अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने 21 फरवरी को थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। इसके बाद, 13 मई 2026 को उसे गंभीर अवस्था में बलरामपुर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की टीम ने तुरंत उसका इलाज और देखभाल शुरू की।
अस्पताल की टीम ने केवल दवाइयों से ही नहीं, बल्कि आत्मीयता, सुरक्षा और भावनात्मक संबल देकर महिला की स्थिति में तेजी से सुधार किया। मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने परिजनों की खोज की, उनसे संपर्क साधा और महिला को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया।
डॉ. बी.के.एस. चैहान (निदेशक) ने कहा कि ष्मानसिक रोगियों के इलाज में चिकित्सीय ज्ञान के साथ-साथ मानवीय व्यवहार और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण होती है। हमारी पूरी टीम का यह समर्पण सराहनीय है।ष्डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) ने कहा कि ष्मरीज के इलाज और सुरक्षा के साथ-साथ उसकी पहचान कर परिवार तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता थी, जिसे टीम ने पूरी जिम्मेदारी से निभाया।ष् डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव (चिकित्सा अधीक्षक) ने कहा कि ष्मरीज का पूरी तरह ठीक होकर अपने परिवार से मिलना पूरी मेडिकल टीम के लिए बेहद संतोषजनक और गर्व का क्षण है।
इस पूरी घटना ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान केवल दवा देने की जगह नहीं हैं, बल्कि वे असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए एक मजबूत सहारा और उम्मीद की किरण भी हैं।
