लखनऊ। राजधानी के जलकल विभाग जोन-5 (आलमबाग) में सरकारी पारदर्शिता और टेंडर प्रक्रियाओं को ठेंगे पर रखा जा रहा है। श्सूबे की आवाजश् की टीम द्वारा ठेकेदार बनकर की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग में जलकल विभाग के भ्रष्टाचार और धांधली का बड़ा खुलासा हुआ है। जिस विभाग पर जनता को स्वच्छ और निर्बाध जल आपूर्ति का जिम्मा है, वहां अफसरों और चुनिंदा ठेकेदारों की मिलीभगत से टेंडर प्रक्रिया को महज एक कागजी औपचारिकता बना दिया गया है।
ग्राउंड इन्वेस्टीगेशन दौरान जलकल विभाग जोन-5 के कार्यालय में वित्तीय व प्रशासनिक नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ती पाई गईं। नियमानुसार हर सरकारी टेंडर की नोटिस सार्वजनिक सूचना पट्ट पर चस्पा होनी चाहिए ताकि खुली प्रतिस्पर्धा हो सके। लेकिन जोन-5 में टेंडर नोटिस चस्पा ही नहीं की जाती। टेंडर बॉक्स किसी सार्वजनिक और सुलभ स्थान पर होना चाहिए, लेकिन यहां टेंडर पेटिका अधिकारी के बंद कमरे में रखी जाती है ताकि कोई आम ठेकेदार फॉर्म न डाल सके। अधिशासी अभियंता ओम प्रकाश के देखरेख में पारदर्शिता के नाम पर पीपे का सहारा लिया जा रहा है। यदि इस टेंडर पेटिका और पीपे की फोरेंसिक जांच करा ली जाए, तो यह साफ हो जाएगा कि इसे सालों से खोला ही नहीं गया है।
बिना किसी खुली प्रतिस्पर्धा के मनपसंद और चहेते ठेकेदारों को फॉर्म बांट दिए जाते हैं, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है और टेंडर का निष्पक्ष वितरण पूरी तरह खत्म हो चुका है।
यह पूरा मामला कानपुर में हुए उस बहुचर्चित टेंडर घोटाले की याद दिलाता है, जहां नगर निगम और जल संस्थान के अधिकारियों ने मिलकर बिना कोई सूचना चस्पा किए और टेंडर बॉक्स को बंद कमरों में छिपाकर करोड़ों रुपये के फर्जी टेंडर अपने चहेते ठेकेदारों के नाम आवंटित कर दिए थे। कानपुर में जब जांच बैठी, तो खुलासा हुआ कि कागजों पर ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई और बिना काम हुए भुगतान निकाल लिया गया।
लखनऊ जलकल विभाग जोन-5 में भी ठीक वही श्कानपुर मॉडलश् दोहराया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों से टेंडर पेटिका हटाना और सूचना पट्ट गायब करना इस बात का सीधा सबूत है कि यहां बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल चल रहा है।
प्रशासनिक उच्चाधिकारियों से सीधी मांग लखनऊ नगर निगम आयुक्त और शासन के वरिष्ठ अधिकारी जलकल जोन-5 के टेंडर आवंटन की तुरंत जांच कराएं। टेंडर पेटिका की धूल और सील की फोरेंसिक जांच हो, जिससे यह साबित हो सके कि यह सालों से बंद पड़ी है। अधिशासी अभियंता ओम प्रकाश सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक व विभागीय कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इस पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो राजधानी का जलकल विभाग भी कानपुर की तरह वित्तीय अनियमितताओं का सबसे बड़ा केंद्र बनकर रह जाएगा।
