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लखनऊ: आरटीओ से 50 किमी दूर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर, ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था लड़खड़ाईरोज 400 से गिरकर 10 पर पहुंचे आवेदक, 75 जिलों में 150 करोड़ राजस्व पर संकट


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था में 14 सितंबर 2026 से बड़ा बदलाव किया गया है। अब लाइसेंस टेस्ट ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर मौदा, उदेतखेड़ा में सेंसर-बेस्ड ट्रैक और कैमरों से लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के बाद राजधानी में लाइसेंस प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई है।सालों से आरटीओ ग्राउंड पर सुगम व्यवस्थाकई साल से ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट आरटीओ कार्यालय के ग्राउंड पर ही सही तरीके से हो रहे हैं। ट्रांसपोर्ट नगर और देवा रोड स्थित आरटीओ कार्यालय शहर के बीच में होने से महिला, दिव्यांग, वरिष्ठ नागरिक सहित सभी वर्ग के अभ्यर्थी आसानी से पहुंच जाते हैं। एक ही परिसर में आवेदन, जानकारी, टेस्ट और सभी सुविधाएं होने से लोगों को बिना किसी सहारे के सुगमता से लाइसेंस प्राप्त हो जाता है।दूरी बनी सबसे बड़ी बाधानई व्यवस्था में ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ से एडीटीसी मौदा की दूरी 20 किलोमीटर और देवा रोड आरटीओ से 50 किलोमीटर है। आवेदक को पहले आरटीओ आना पड़ता है, फिर टेस्ट के लिए मौदा जाना पड़ता है। दो जगह के चक्कर और लंबी दूरी के कारण आवेदकों ने दूरी बना ली है।आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। पहले जहां रोजाना 250 से 400 लोग लाइसेंस बनवाने आते थे, अब 14 सितंबर के बाद रोजाना औसतन 5 से 10 अभ्यर्थी ही एडीटीसी पहुंच रहे हैं।राजस्व को करोड़ों का नुकसानआवेदकों की संख्या घटने से सरकार को सीधा आर्थिक नुकसान हो रहा है। पहले रोजाना 3 से 4 लाख रुपये लाइसेंस फीस के रूप में आते थे, अब यह घटकर 10 से 15 हजार रुपये पर सिमट गई है।अगर सिर्फ फेल होने वाले अभ्यर्थियों को ही ट्रेनिंग के लिए एडीटीसी भेजा जाए तो जनता को सुविधा रहेगी और राजस्व बढ़ेगा। 250 से 400 लाइसेंस प्रतिदिन के हिसाब से एक जिले से हर महीने सिर्फ लाइसेंस फीस से 70 लाख से 2 करोड़ रुपये तक का राजस्व आ सकता है। 75 जिलों की बात करें तो यह आंकड़ा 70 करोड़ से 150 करोड़ रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकता है।सेंसर में गड़बड़ी पर जिम्मेदार कौननई व्यवस्था में टेस्ट रिपोर्ट सेंसर पर निर्भर है और पास-फेल का फैसला प्राइवेट कंपनी की रिपोर्ट के आधार पर हो रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सेंसर की तकनीकी गड़बड़ी होने पर जिम्मेदार कौन होगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि आरटीओ के अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी में ग्राउंड टेस्ट ज्यादा पारदर्शी था।मांग है कि आरटीओ ग्राउंड पर ही पूर्व की तरह टेस्ट जारी रखा जाए और जो अभ्यर्थी फेल हो जाएं, सिर्फ उन्हें ही सुधार और प्रशिक्षण के लिए एडीटीसी मौदा भेजा जाए।

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