- प्लाटिंग और जमीन का मांगा हिसाब
- नदी की सीमा में अवैध प्लाटिंग या निर्माण मिला तो होगी कार्रवाई
- ध्वस्त मकान मालिक के नुकसान की भरपाई के भी निर्देश
पीलीभीत। शहर के नक्शा चैराहा क्षेत्र के पास स्थित केजीएन-2 कॉलोनी में खाकरा नदी किनारे निर्माणाधीन मकान पर बुलडोजर चलाए जाने के बाद अब प्रशासन ने पूरी कॉलोनी में नदी किनारे हुई प्लाटिंग को जांच के दायरे में लेने का फैसला किया है। प्रशासन ने कॉलोनी में जमीन की बिक्री, प्लाटिंग और नदी की सीमा से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू करने की तैयारी कर ली है। इस मामले में सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से कॉलोनाइजर और सपा नेता नफीस अहमद अंसारी को नोटिस जारी कर जमीन और प्लाटिंग से संबंधित स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि नदी की सीमा में अवैध प्लाटिंग अथवा निर्माण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे केजीएन-2 कॉलोनी में नदी किनारे हुए निर्माण और प्लाटिंग को लेकर सवाल और गहरा गए हैं।
दरअसल, बीते दिवस खाकरा नदी के किनारे एनजीटी के नियमों के उल्लंघन के आरोप में निर्माणाधीन मकान पर प्रशासन ने जेसीबी चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया था। नगर पालिका की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन मकान को गिरा दिया। मकान जियाउद्दीन का बताया गया है।
कार्रवाई के दौरान मकान मालिक जियाउद्दीन ने दावा किया था कि उसने केजीएन-2 कॉलोनी में सपा नेता नफीस अहमद अंसारी से प्लाट खरीदा था। उसका कहना था कि वह कर्ज लेकर मकान का निर्माण करा रहा था। निर्माण पूरा होने से पहले ही प्रशासन की कार्रवाई हो गई और उसका निर्माणाधीन मकान ध्वस्त कर दिया गया।
मकान ध्वस्तीकरण के बाद मामला सिर्फ एक निर्माण तक सीमित नहीं रहा। प्रशासन ने अब नदी किनारे पूरी प्लाटिंग की स्थिति जांचने का निर्णय लिया है। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस में नफीस अहमद अंसारी से जमीन की स्थिति, प्लाटिंग और उससे जुड़े तथ्यों पर जवाब मांगा गया है।प्रशासन यह भी देखेगा कि नदी की सीमा से कितनी दूरी पर प्लाट काटे गए और कहीं नदी की जमीन अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र में प्लाटिंग या निर्माण तो नहीं कराया गया। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
मामले में प्रशासन की ओर से ध्वस्त किए गए निर्माण के मालिक जियाउद्दीन को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई कराने के लिए भी सपा नेता नफीस अहमद अंसारी को निर्देश दिए गए हैं। इससे मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि एक तरफ नदी किनारे निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर प्लाट खरीदकर निर्माण कराने वाले व्यक्ति के आर्थिक नुकसान का मुद्दा भी सामने आया है।
प्रशासन की जांच अब यह तय करेगी कि केजीएन-2 में नदी किनारे जमीन की बिक्री और प्लाटिंग किस तरह हुई। यदि जांच में नदी की सीमा में प्लाटिंग अथवा नियमों के विपरीत निर्माण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नोटिस के जवाब और जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजर है।इस कार्रवाई के बाद केजीएन-2 कॉलोनी में नदी किनारे बिके प्लाटों और वहां हुए निर्माण को लेकर हलचल तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि जांच में नदी किनारे हुई प्लाटिंग और निर्माण को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इसके बाद कितनी व्यापक कार्रवाई करता है।
