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गाजीपुरः पितृपक्ष में नहीं होंगे मांगलिक कार्य, सात्विक आहार पर जोर! 26 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, 10 अक्टूबर तक चलेगा श्राद्ध पक्ष


भांवरकोल/गाजीपुर। पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान और दान-पुण्य करते हैं। इस वर्ष पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध पक्ष में सादगी, संयम और सात्विक आचरण का विशेष महत्व है।

पितृपक्ष के दौरान मांस, मछली, अंडा, मदिरा तथा अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से बचने की परंपरा है। भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग भी कई परिवारों में नहीं किया जाता। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को मसूर की दाल, काली उड़द और चना आदि से परहेज करने की मान्यता है। इस दौरान सात्विक भोजन को ही प्राथमिकता दी जाती है।

मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में विवाह, सगाई, मुंडन, उपनयन संस्कार और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। नए मकान, जमीन अथवा वाहन की खरीदारी तथा नए व्यापार की शुरुआत को भी इस अवधि में टालने की परंपरा है। सोने-चांदी के आभूषण, नए कपड़े और अन्य विलासिता की वस्तुओं की खरीदारी से भी लोग परहेज करते हैं।

श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति के लिए बाल, दाढ़ी-मूंछ और नाखून कटवाने से बचने की परंपरा है। साथ ही भोग-विलास से दूर रहकर संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में क्रोध, झूठ, अपशब्द, किसी का अपमान करने और घर-परिवार में कलह से बचना चाहिए।

पितृपक्ष में जरूरतमंदों को भोजन कराने और दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक जानकारों के अनुसार श्राद्ध पक्ष का उद्देश्य केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

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