लखनऊ। राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के एक कथित गोपनीय आंतरिक सर्वे को लेकर जबरदस्त चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शीर्ष संगठन द्वारा कराए गए सर्वे में 67 विधायकों की रिपोर्ट कार्ड बेहद खराब पाई गई है और आगामी विधानसभा चुनाव (मिशन-2027) में इनका पत्ता कटना तय माना जा रहा है।
भाजपा जैसी कैडर-बेस्ड पार्टी में हर चुनाव से पहले या कार्यकाल के मध्य में स्वतंत्र एजेंसियों और सांगठनिक फीडबैक के जरिए विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करना एक नियमित प्रक्रिया है। यूपी में लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद संगठन स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकें और फीडबैक कलेक्शन चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और अंदरूनी सूत्रों में 50 से 70 सीटों पर विधायकों के प्रति असंतोष (एंटी-इंकम्बेंसी) की बातें सामने आई हैं। भाजपा प्रदेश नेतृत्व या केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से ऐसी किसी 67 विधायकों की आधिकारिक सूची या आंकड़े की पुष्टि अभी नहीं की गई है।टिकट काटने या बदलने का अंतिम फैसला चुनाव के ठीक पहले केंद्रीय नेतृत्व की मुहर के बाद ही होता है। हालांकि, 30ः से 35ः मौजूदा विधायकों के टिकट काटने का अनुमान राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर लगाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है। हालिया लोकसभा चुनाव के परिणामों के बाद पार्टी अब अधिक सतर्क है।
भाजपा गुजरात और अन्य राज्यों में लागू किए गए अपने ष्नो-रिपीट या मैसिव टिकट कटष् फॉर्मूले के लिए जानी जाती है। यदि किसी विधायक की अपने क्षेत्र में जनता या स्थानीय कार्यकर्ताओं से दूरी बन गई है, तो नए चेहरे को मैदान में उतारकर सत्ता विरोधी लहर का असर शून्य कर दिया जाता है।
गोपनीय रिपोर्ट में निम्नलिखित बिंदुओं पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है कि विधायक आम जनता और कार्यकर्ताओं के लिए कितना उपलब्ध रहता है। विधायक निधि का सही इस्तेमाल और सरकारी योजनाओं का धरातल पर क्रियान्वयन। क्या विधायक अपने क्षेत्र में विपक्षी समीकरणों (ओबीसी, दलित और मुस्लिम लामबंदी) से मुकाबला करने में सक्षम है।
भाजपा को इस बार अपने सहयोगी दलों (जैसे त्स्क्, ैठैच्, अपना दल आदि) को भी सीटें समायोजित करनी हैं। ऐसे में कई मौजूदा विधायकों की सीटों पर फेरबदल होना या टिकट कटना स्वाभाविक माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, जिन विधायकों को अपने प्रदर्शन पर संदेह है, वे संगठन के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के चक्कर लगाने लगे हैं। हालांकि, भाजपा का रुख साफ है कि लॉबिंग के बजाय केवल श्परफॉर्म और डिलीवरश् करने वाले नेताओं को ही प्राथमिकता मिलेगी।
उत्तर प्रदेश में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। 67 विधायकों का सटीक आंकड़ा भले ही कयासबाजी हो, लेकिन यह तय है कि मिशन-2027 को फतेह करने के लिए भाजपा अपने कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नए, युवा और सामाजिक रूप से संतुलित चेहरों पर दांव लगाने से पीछे नहीं हटेगी।
