लखनऊ: राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के खिलाफ 10 राज्यों के किसानों का विरोध
September 25, 2026
लखनऊ। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की पॉलीहाउस योजना से जुड़े किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सहायता में कटौती, पात्रता के नए नियमों और लंबित मंजूरियों को लेकर विरोध दर्ज कराया है। किसानों के अनुसार जून 2026 सेकी ओर से पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए नई जीओसी जारी नहीं की गई है और नए जीओसी आवेदन भी बंद हैं। उनका कहना है कि इससे नई परियोजनाओं पर काम शुरू करने वाले किसान, निर्माता, आपूर्तिकर्ता और निर्माण टीमें प्रभावित हो रही हैं।किसानों और उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, परियोजनाओं में देरी बढ़ने पर पहले से मंजूर बैंक ऋण की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है। इससे ऋण का दोबारा मूल्यांकन, नई शर्तें या कुछ मामलों में मंजूरी रद्द होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि यदि परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन की प्रक्रिया जल्द बहाल नहीं हुई तो पॉलीहाउस निर्माण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार भी प्रभावित हो सकता है।आयोजकों के अनुसार, पॉलीहाउस किसानों ने साझा अभियान के तहत 11 शहरों में कार्यालयों के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इसमें अहमदाबाद, जयपुर, भोपाल, लखनऊ, बेंगलुरु, देहरादून, चंडीगढ़, रायपुर, चेन्नई तथा महाराष्ट्र के पुणे और नाशिक में हुए कार्यक्रम शामिल रहे। महाराष्ट्र में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम अलग-अलग होने के बावजूद उन्हें इसी साझा अभियान का हिस्सा बताया गया।किसानों ने साझा ज्ञापन के माध्यम से छभ्ठ से 21 अगस्त को जारी सर्कुलर वापस लेने, पॉलीहाउस परियोजनाओं के लिए 50 प्रतिशत सहायता बहाल करने और भविष्य में नए नियम लागू करने से पहले संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने की मांग की है।आंदोलन से जुड़े किसानों ने छभ्ठ को सात दिन का समय देते हुए लिखित जवाब देने और 21 अगस्त के सर्कुलर को वापस लेने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में किसानों ने छभ्ठ मुख्यालय, गुरुग्राम में दोबारा बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।इसके अलावा आवेदन शुल्क, उस पर लगने वाले ळैज् तथा जमीन की लागत से जुड़े नियमों को सरल बनाने की मांग भी उठाई गई है।किसानों ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसान बार-बार कार्यालयों और अधिकारियों से जानकारी लेने के लिए मजबूर न हों।किसानों ने इस पूरे मामले में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री एवं छभ्ठ के पदेन उपाध्यक्ष भागीरथ चैधरी, छभ्ठ और कृषि मंत्रालय से स्पष्ट जवाबदेही तय करने की मांग की है।आंदोलन से जुड़े किसानों ने कहा कि अब उनकी प्राथमिक मांग विवाद नहीं, बल्कि लंबित मंजूरियों का समयबद्ध निपटारा, स्पष्ट नियम, पुराने निवेश की सुरक्षा और नई परियोजनाओं के लिए पारदर्शी प्रक्रिया की बहाली है। उन्होंने छभ्ठ और कृषि मंत्रालय से जल्द लिखित जवाब और व्यावहारिक समाधान की मांग की है।
