संग्रामपुर: कृषि विभाग के असहयोग से सुतली उत्पादन पर संकट, किसान परेशान
July 24, 2026
संग्रामपुर/अमेठी। सुतली या रस्सियां बनाने के लिए उपयोग होने वाली रेशा फसल सनई है जिसकी खेती और उससे जुड़ा पारंपरिक सुतली उद्योग सरकारी और कृषि विभाग के उचित प्रोत्साहन और सहयोग के अभाव में लगातार विलुप्त हो रही है । अमेठी जिले के विकासखंड संग्रामपुर क्षेत्र में पूर्व में पारंपरिक खेती समझ कर कई गांव के किसान सैकड़ों हेक्टेयर भूमि पर सनई की खेती करते थे लेकिन आज संग्रामपुर क्षेत्र में मात्र एक गांव जोगा अम्मरपुर जहां लगभग 10 से 15 किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार सनई की खेत कर रहे हैं गांव के किसान सीताराम ने बताया कि पूर्व में लगभग एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती करते थे लेकिन आज कृषि विभाग द्वारा सनई जैसी पारंपरिक रेशा फसलों के बीज का समय पर वितरण और किसानों को विशेष अनुदान योजनाओं से ना जोड़ने के कारण बाहर से बीज लाकर अपनी आवश्यकता अनुसार अधिक से अधिक पांच विश्वा ही सनई की खेती कर रहे हैं सनई से बने सन की सफाई कर रही किसान महिला रसीला देवी ने बताया कि आधुनिक मशीनीकरण और रेशा निकालना उन्नत तकनीकी की जानकारी न मिलने से अधिक मेहनत पड़ती है जिसके कारण सनई की खेती करने में किसान पिछड़ रहे हैं। महिला किसान कमला और विमला ने बताया कि नायलॉन और प्लास्टिक की सस्ती रस्सियों की मांग होने के कारण पारंपरिक प्राकृतिक सुतली की मांग में गिरावट आई है। इसलिए हम लोग अपनी आवश्यकता अनुसार ही परिश्रम करके सुतली उत्पादन करते हैं। बद्री प्रसाद शिव बहादुर उर्मिला आदि किसानों की मांग है कृषि विभाग द्वारा सनई की खेती के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए समय पर बीज उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि सनई की खेती से खेतों में हरी खाद की मात्रा बढ़ जाती है। कृषि अधिकारी संग्रामपुर से जानकारी ली गई उन्होंने बताया कि विभाग में सनई की खेती के लिए बीज नहीं उपलब्ध है। यही कारण है कि इच्छुक किसानों को बाहर से महंगे दाम देकर सनई का बीज लाना पड़ता है। यही कारण है कि आज खेतों में हरी खाद व सुतली उद्योग प्रभावित है।
