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प्रतापगढ़ः मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना बनी दर्पिता के सपनों की उड़ान! पिता के निधन के बाद आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार को मिला सरकार का सहारा


प्रतापगढ। जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं, जब सब कुछ समाप्त होता हुआ दिखाई देता है। परिवार का सहारा छिन जाने के बाद बच्चों की शिक्षा, उनका भविष्य और उनके सपने अधूरे रह जाने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे कठिन समय में यदि सरकार संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़कर सहयोग का हाथ थाम ले, तो वही सहायता किसी बच्चे के भविष्य को नई दिशा देने का माध्यम बन जाती है। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) ऐसी ही एक जनकल्याणकारी पहल है, जो माता-पिता अथवा किसी एक अभिभावक को खो चुके बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण अपनी शिक्षा बीच में न छोड़े। इसी सोच के अनुरूप संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत मार्च-2020 के बाद जिन बच्चों के माता, पिता अथवा दोनों का निधन हो गया है, उन्हें शिक्षा, पोषण एवं अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह सहायता बच्चों के 23 वर्ष की आयु तक शिक्षा ग्रहण करने की अवधि में उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सके।

इसी योजना ने जनपद प्रतापगढ़ की एक होनहार छात्रा दर्पिता सिंह के जीवन में भी नई रोशनी बिखेरी है। टक्करगंज निवासी दर्पिता सिंह के पिता स्वर्गीय प्रदीप सिंह का आकस्मिक निधन हो जाने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता की असमय मृत्यु से परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई। दर्पिता की माता प्रतिभा वर्मा के सामने सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी की पढ़ाई और उसके भविष्य को लेकर थी। सीमित संसाधनों के कारण ऐसा प्रतीत होने लगा था कि दर्पिता की शिक्षा बीच में ही रुक जाएगी और उसके सपने अधूरे रह जाएंगे। इसी दौरान किसी परिचित के माध्यम से उन्हें मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की जानकारी मिली। जानकारी प्राप्त होने के बाद उन्होंने महिला कल्याण विभाग, प्रतापगढ़ से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों ने उन्हें योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों एवं आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी तथा आवेदन कराने में पूरा सहयोग प्रदान किया। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दर्पिता का आवेदन स्वीकृत हो गया और उसे मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी।

सरकार की इस सहायता ने दर्पिता और उसके परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव लाया। अब उसकी पढ़ाई नियमित रूप से जारी है। स्कूल की फीस, पुस्तकें, स्टेशनरी, यूनिफॉर्म तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री की व्यवस्था पहले की अपेक्षा आसान हो गई है। इसके साथ ही उसकी दैनिक आवश्यकताओं और पोषण संबंधी जरूरतों की भी बेहतर ढंग से पूर्ति हो रही है। आर्थिक सहायता मिलने से परिवार का मानसिक तनाव कम हुआ है और दर्पिता पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रही है। वर्तमान में दर्पिता कक्षा-8 की छात्रा है। वह पढ़ाई में रुचि रखती है और भविष्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी बनकर समाज एवं देश की सेवा करना चाहती है। उसका कहना है कि जिस प्रकार सरकार ने कठिन समय में उसका साथ दिया, उसी प्रकार वह भी आगे चलकर प्रशासनिक अधिकारी बनकर जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहती है। उसके इस संकल्प में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना एक मजबूत आधार बनकर खड़ी है। 

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना आज उन हजारों बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है, जिन्होंने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करते हुए उन्हें शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी दिखा रही है। सरकार का यह प्रयास निश्चित रूप से ऐसे बच्चों के सपनों को साकार करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम सिद्ध हो रहा है।

जनपद प्रतापगढ़ में महिला कल्याण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में जून माह तक 471 नए लाभार्थियों को योजना का लाभ प्रदान किया गया है, जबकि वर्तमान में जनपद के 2,907 बच्चे इस योजना के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि योजना वास्तव में उन परिवारों तक पहुंच रही है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

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