लखनऊ। राजधानी के काकोरी थाना क्षेत्र में हरे-भरे वृक्षों पर अवैध रूप से आरा चलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को काकोरी के शिवरी गांव में कूड़ा प्लांट के पास लकड़हारों ने बेखौफ होकर आधा दर्जन सागवान और कई नीम के हरे-भरे पेड़ों पर आरा चला दिया। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है और वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुबग्गा वन रेंज के अंतर्गत आने वाले शिवरी गांव में कूड़ा प्लांट के समीप देर रात और तड़के लकड़हारों ने अवैध कटान को अंजाम दिया। सूत्रों के मुताबिक, लकड़ी माफियाओं ने बड़ी ही चालाकी से लगभग आधा दर्जन कीमती सागवान और छांव देने वाले नीम के पेड़ों को काट गिराया। देखते ही देखते लहलहाते पेड़ जमीन पर बिछ गए।
एक तरफ जहां वन विभाग लगातार क्षेत्र में पौधरोपण और अवैध कटान पर रोक लगाने के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ दुबग्गा वन रेंज में लगातार हो रही कटाई इन दावों की कलई खोल रही है। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि लकड़हारों को प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अगर वन विभाग की गश्त और निगरानी चुस्त होती, तो इस तरह खुलेआम पेड़ों की बलि न चढ़ाई जाती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ के प्रभागीय वनाधिकारी सितांशु पांडे ने अवैध कटान में शामिल लोगों और लकड़ी माफियाओं के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, डीएफओ के आदेशों के बाद भी धरातल पर कटान न रुकना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर या तो लापरवाही बरती जा रही है या फिर नियमों का पालन कराने में अमला पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
क्षेत्रीय सूत्रों का कहना है कि दुबग्गा वन रेंज में आए दिन हरे-भरे पेड़ों को निशाना बनाया जा रहा है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जांच कर दोषियों और उनके आकाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा और हरियाली नाममात्र की रह जाएगी। स्थानीय लोगों ने अब शासन-प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर इसमें शामिल सभी दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
