लखनऊ। राजधानी से धोखाधड़ी, आपराधिक इतिहास छिपाने और अनुकम्पा नियुक्ति के नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। एक कैंसर पीड़ित बेसहारा मां ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर अपने ही बड़े बेटे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीड़ित मां ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाते हुए बेटे की अनुकम्पा नियुक्ति को तत्काल निरस्त करने और इस साजिश में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
चिनहट क्षेत्र की रहने वाली 50 वर्षीय प्रमिला देवी गंभीर रूप से कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति स्व. रामाश्रय राम जल संस्थान में कर संचयक के पद पर कार्यरत थे, जिनका वर्ष 2011 में आकस्मिक निधन हो गया था। पति की मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे मृत्युंजय को इस शर्त पर अनुकम्पा नियुक्ति (मृतक आश्रित नियमावली 1974 के तहत) दी गई थी कि वह परिवार के बाकी सदस्यों (मां और छोटे भाई-बहनों) का भरण-पोषण और संरक्षण करेगा। इसके लिए उसने विभाग को बाकायदा एक शपथ पत्र भी सौंप रखा था।
पीड़िता प्रमिला देवी का आरोप है कि नौकरी मिलते ही बड़े बेटे मृत्युंजय का रवैया पूरी तरह बदल गया। उसने कैंसर पीड़ित मां की देखभाल और इलाज का खर्च उठाने से साफ मना कर दिया और उन्हें बेहद दयनीय स्थिति में बेसहारा छोड़कर अलग रहने लगा। इस क्रूर व्यवहार से तंग आकर मां ने वर्ष 2017 में अपने इस बेटे से सभी कानूनी संबंध तक विच्छेद कर दिए थे।
शिकायती पत्र में मृत्युंजय पर विभाग को गुमराह करने और तथ्यों को छिपाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नियुक्ति से पूर्व मृत्युंजय पर लड़की से छेड़खानी व उत्पीड़न का गंभीर आपराधिक मामला दर्ज था। उसने जानबूझकर विभाग के समक्ष अपने इस आपराधिक इतिहास को छुपाया। पीड़िता के नाम पर वर्ष 2008 में आवंटित एक सरकारी राशन कोटा था, जो परिवार की आय का जरिया था। पति की मृत्यु के बाद मानसिक रूप से विचलित मां का फायदा उठाकर मृत्युंजय ने धोखे से उनके हस्ताक्षर करवाए और स्वयं को वित्तीय संकट में दिखाकर कपटपूर्वक अनुकम्पा नियुक्ति हासिल कर ली।
पत्र में स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नगर निगम व जल संस्थान के जिम्मेदार अधिकारियोंकृमहाप्रबंधक कुलदीप सिंह, सचिव धर्मेन्द्र सत्संगी, लेखाधिकारी पंकज सोती और नगर आयुक्त गौरव कुमार को मृत्युंजय के आपराधिक इतिहास, मां को बेसहारा छोड़ने और तथ्यों को छिपाने की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर बिना भौतिक सत्यापन के केवल जांच की खानापूर्ति की गई और आरोपी को अनुचित संरक्षण देते हुए उसकी पदोन्नति का रास्ता भी साफ कर दियाहै कि पीड़ित मां की इस गुहार पर शासन-प्रशासन क्या और कितनी जल्दी एक्शन लेता है गया।
पीड़ित मां प्रमिला देवी ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय श्अवतार सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2016)श् का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से निम्नलिखित मांगें की हैं कि आरोपी मृत्युंजय की अनुकम्पा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। विभाग को गुमराह करने और झूठा शपथ पत्र देने के आरोप में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए। भ्रष्टाचार की नीयत से अर्जित की गई आय की जांच मंडल स्तर के उच्च अधिकारी से निष्पक्ष कराई जाए।आरोपी कर्मचारी को अनुचित संरक्षण देने वाले और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस शिकायत की प्रतिलिपियां प्रमुख सचिव (नगर विकास), मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं। अब देखना यह
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