लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी से दलित और पिछड़े वर्ग के किसानों के शोषण और करोड़ों रुपये के भूमि-सह-बैंक घोटाले का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। किसान नेता देवेंद्र तिवारी ने अमित तिवारी और संतोष तिवारी नाम के दो व्यक्तियों पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के गरीब किसानों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने, उन्हें औने-पौने दामों या जबरन बेचने, और बैंक अधिकारियों की साठगांठ से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का संगीन आरोप लगाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए किसान नेता ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
किसान नेता देवेंद्र तिवारी के अनुसार, यह भूमि घोटाला पिछले काफी समय से प्रशासनिक गलियारों और पीड़ित किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था। मामले की तह तक जाने के लिए देवेंद्र तिवारी ने हाल ही में पीड़ित किसानों से मुलाकात की।
मुलाकात के दौरान किसानों ने रो-रोकर अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद घोटाले की कड़ियों को जोड़ने वाले दस्तावेजी सबूत जुटाए गए। इन सबूतों के आधार पर ही अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। उन्होंने कहा कि ष्अमित तिवारी और संतोष तिवारी ने सत्ता और रसूख के बल पर उन गरीब ैब्-ैज् किसानों को निशाना बनाया, जो प्रशासनिक पेचीदगियों को समझने में असमर्थ थे। यह केवल जमीन कब्जाने का मामला नहीं है, बल्कि यह बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर किया गया एक सुनियोजित और संगठित आर्थिक अपराध है।
शिकायत में सबसे चैंकाने वाला खुलासा बैंक अधिकारियों की भूमिका को लेकर हुआ है। आरोप है कि रसूखदारों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पीड़ित किसानों के नाम पर फर्जी तरीके से खाते खोले या उनके मौजूदा खातों का दुरुपयोग किया। किसानों की जमीनों को जबरन या धोखे से बेचने के बाद जो रकम खातों में आई, उसे बैंक कर्मियों की मिलीभगत से गायब कर दिया गया। घोटाले के शिकार अधिकांश किसान इतने सीधे और अनपढ़ हैं कि उन्हें लंबे समय तक यह भनक भी नहीं लगी कि उनके नाम पर करोड़ों रुपये का हेरफेर किया जा चुका है।
किसान नेता देवेंद्र तिवारी ने उत्तर प्रदेश शासन और स्थानीय प्रशासन के समक्ष अपनी मजबूत मांगें रखी हैं कि विवादित और अवैध रूप से कब्जा की गई सभी जमीनों की आगे की खरीद-फरोख्त (रजिस्ट्री) पर तुरंत रोक लगाई जाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच के लिए एक विशेष टीम (ैप्ज्) का गठन किया जाए। अमित तिवारी, संतोष तिवारी और इस सिंडिकेट में शामिल बैंक अधिकारियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर उनकी संपत्ति कुर्क की जाए। जिन लाचार किसानों की जमीनें छीनी गई हैं, उन्हें तत्काल प्रशासनिक सुरक्षा देकर उनकी जमीनें वापस दिलाई जाएं।
मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामला पहुंचने के बाद शासन और प्रशासनिक स्तर पर हलचल काफी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ष्भू-माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंसष् नीति को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
फिलहाल, पीड़ित किसान अपनी आजीविका का एकमात्र साधन (जमीन) वापस पाने और न्याय की उम्मीद में सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं। अधिकारियों ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि मामले के दस्तावेजों का परीक्षण शुरू कर दिया गया है।
