'वंदे मातरम' का अपमान किया तो होगी कानूनी कार्रवाई! जबरदस्ती संविधान के खिलाफ-मौलाना सैफ अब्बास
July 17, 2026
केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में 'द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026' पेश करने की तैयारी में है. इस प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य 'वंदे मातरम' का अपमान करने या उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना है. अगर यह बिल कानून बनता है, तो 'वंदे मातरम' को भी कानूनी संरक्षण उसी तरह मिलेगा, जैसा फिलहाल राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राप्त है.
प्रस्तावित बिल के अनुसार, राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन कर 'वंदे मातरम' को भी शामिल किया जाएगा. यानी यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर 'वंदे मातरम' के गायन को रोकता है, उसमें व्यवधान पैदा करता है या उसका अपमान करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी.
इसी प्रस्ताव पर शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि देश में आमतौर पर कोई 'वंदे मातरम' का अपमान नहीं करता, लेकिन किसी पर इसे थोपना उचित नहीं होगा.
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा, "देखिए ऐसा है कि जहां तक वंदे मातरम की बात है, उसका ना अपमान कोई करता है और ना कोई उसमें बाधा डालता है. लेकिन जब आप किसी के ऊपर संविधान के खिलाफ जाकर जोर-जबरदस्ती करेंगे तो फिर एक अलग बात है. मैं ये समझता हूं सरकार को खुद सोचना चाहिए कि वंदे मातरम का क्या महत्व है. उसको लोगों से अवगत कराएं और किसी के ऊपर जोर-जबरदस्ती की बात ना की जाए."
दरअसल, सरकार का तर्क है कि संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के समान सम्मान प्राप्त होगा. हालांकि, अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है जो 'वंदे मातरम' के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने पर कार्रवाई सुनिश्चित करता हो। इसी कमी को दूर करने के लिए यह संशोधन प्रस्तावित किया गया है.
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 'वंदे मातरम' विवाद पर कहा, "वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरों (अंतरों/पदों) को ही आधिकारिक मान्यता प्राप्त है. मैं मुस्लिम हूं और मैं 'वंदे मातरम' कहता हूं, लेकिन पूरे गीत का पाठ करने पर जोर देना गलत है. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान के खिलाफ कुछ भी नहीं किया जा सकता. आरएसएस अपनी शाखाओं में 'जन गण मन' की जगह जानबूझकर पूरा 'वंदे मातरम' गाता है."
अगर यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो भविष्य में 'वंदे मातरम' का अपमान करना या उसके गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना कानूनन अपराध माना जाएगा. ऐसे में सरकार के इस कदम ने एक नई बहस छेड़ दी है, क्या राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की रक्षा के लिए सख्त कानून जरूरी हैं, या सम्मान जागरूकता और सहमति से ही सुनिश्चित होना चाहिए?
