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प्रतापगढः रणंजय सिंह बने प्रगतिशील मत्स्य पालक आत्मनिर्भरता की मिसाल


प्रतापगढ। उत्तर प्रदेश में कृषि एवं उससे जुड़े व्यवसायों को नई दिशा देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित योजनाओं ने हजारों युवाओं और किसानों के जीवन में परिवर्तन लाया है। इन्हीं योजनाओं का लाभ उठाकर जनपद प्रतापगढ़ के विकास खंड सण्ड़वा चंद्रिका के ग्राम कटका मानापुर निवासी प्रगतिशील मत्स्य पालक रणंजय सिंह ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि “ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं है।” प्रदेश सरकार की इसी सोच का परिणाम है कि आज गांवों में रहने वाले किसान और युवा आधुनिक तकनीकों को अपनाकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही हैं।

ग्राम कटका मानापुर के निवासी रणंजय सिंह पुत्र रणवीर सिंह पूर्व में पारंपरिक खेती-किसानी पर निर्भर थे। सीमित कृषि भूमि और बढ़ती लागत के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। खेती से परिवार का भरण-पोषण तो हो जाता था, लेकिन आर्थिक प्रगति की गति काफी धीमी थी। ऐसे समय में उन्होंने समाचार पत्रों और विभागीय प्रचार माध्यमों के जरिए मत्स्य विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। विशेष रूप से मुख्यमंत्री द्वारा ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के अभियान ने उन्हें प्रेरित किया। रणंजय सिंह बताते हैं कि एक दिन उन्होंने समाचार पत्र में मत्स्य विभाग प्रयागराज द्वारा ऑनलाइन आवेदन से संबंधित विज्ञप्ति पढ़ी। इसके बाद उन्होंने जनपदीय कार्यालय पहुंचकर विभागीय अधिकारियों से विस्तारपूर्वक जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाओं के बारे में बताया तथा आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन करने की सलाह दी। विभागीय मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से प्रभावित होकर उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय लिया।

इसके बाद रणजय सिंह ने अपनी निजी भूमि पर बायोफ्लॉक पद्धति से मत्स्य पालन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। लगभग 0.10 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उन्होंने आधुनिक मत्स्य पालन इकाई की स्थापना प्रारंभ की। विभागीय चयन के बाद उन्हें पंगेशियस प्रजाति की मछलियों के पालन की अनुमति मिली। प्रारंभ में यह कार्य उनके लिए नया था, लेकिन उन्होंने प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी के आधार पर पूरी लगन के साथ इसे शुरू किया। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर मिला। मुख्यमंत्री ने कई अवसरों पर कहा है कि “युवा नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बने।” रणंजय सिंह ने इस विचार को व्यवहार में उतारते हुए मत्स्य पालन को केवल आय का साधन नहीं, बल्कि रोजगार सृजन का माध्यम बना दिया।

वर्तमान समय में रणंजय सिंह की परियोजना ग्राम कटका मानापुर में संचालित हो रही है, जो जिला मुख्यालय से लगभग 28 किलोमीटर दूर स्थित है। उनकी मत्स्य पालन इकाई में आधुनिक बायोफ्लॉक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यह तकनीक कम पानी और कम भूमि में अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बायोफ्लॉक प्रणाली पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ कम लागत में अधिक लाभ देने वाली पद्धति है। रणंजय सिंह ने अपनी परियोजना में लगभग 14 लाख रुपये की लागत से निवेश किया। यह निवेश मुख्य रूप से निजी व्यय के माध्यम से किया गया। परियोजना स्थल पर उन्होंने निजी बोरिंग, विद्युत संयोजन और भंडारण व्यवस्था जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित कीं। इससे उनके कार्य को सुचारु रूप से संचालित करने में सहायता मिली।

उन्होंने मत्स्य बीज का संचयन चरणबद्ध तरीके से किया। प्रथम चरण में लगभग 4 लाख तथा द्वितीय चरण में लगभग 8 लाख मत्स्य बीज का संचयन किया गया। विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के अनुसार उन्होंने जल प्रबंधन, आहार व्यवस्था और मछलियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया। परिणामस्वरूप उनकी परियोजना से औसतन 1.40 टन प्रति वर्ष उत्पादन प्राप्त होने लगा। आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई। वर्तमान में उनकी इकाई पर लगभग 7 लाख रुपये वार्षिक लागत आती है, जबकि बिक्री से लगभग 18 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्हें लगभग 6 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। यह आय पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक है। रणंजय सिंह की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है। उनकी परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। वर्तमान में उनकी इकाई पर लगभग 10 लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं। इससे ग्रामीण युवाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हुआ है और पलायन की समस्या में भी कमी आई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में किसानों की आय दोगुनी करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन, डेयरी, पशुपालन और अन्य सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया है। प्रतापगढ़ के रणजय सिंह जैसे किसान इस नीति के वास्तविक उदाहरण बनकर सामने आए हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि इच्छाशक्ति, तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर आर्थिक परिवर्तन संभव है। मत्स्य पालक विकास अभिकरण प्रतापगढ़ द्वारा भी रणंजय सिंह को समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता रहा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार रणजय सिंह ने आधुनिक तकनीक को अपनाकर यह साबित किया है कि कम संसाधनों में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है। विभाग अब उन्हें अन्य किसानों और युवाओं के लिए मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

रणंजय सिंह का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आधुनिक तकनीक की जानकारी सीमित थी और निवेश को लेकर भी चिंता थी। लेकिन विभागीय अधिकारियों के सहयोग तथा मुख्यमंत्री की योजनाओं से प्रेरणा लेकर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार सीखने और मेहनत करने का परिणाम है कि आज उनका व्यवसाय सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है। उन्होंने बताया कि बायोफ्लॉक तकनीक में नियमित निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता होती है। पानी की गुणवत्ता बनाए रखना, ऑक्सीजन स्तर नियंत्रित करना और संतुलित आहार देना अत्यंत आवश्यक होता है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी का उपयोग करते हुए अपनी इकाई को व्यवस्थित रूप से विकसित किया। क्षेत्र के किसान भी अब रणंजय सिंह की सफलता से प्रेरित होकर मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई किसान उनकी इकाई का निरीक्षण करने पहुंचते हैं और उनसे आधुनिक तकनीक की जानकारी प्राप्त करते हैं। रणजय सिंह स्वयं भी अन्य किसानों और युवाओं को इस व्यवसाय के लिए प्रेरित करते हैं। भविष्य की योजनाओं के बारे में रणंजय सिंह बताते हैं कि वह अपनी अतिरिक्त भूमि पर भी विभागीय निर्देशों के अनुरूप नई इकाइयों की स्थापना करना चाहते हैं। उनका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाना तथा अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही वह अपने परिवार के अन्य सदस्यों और आसपास के ग्रामीणों को भी इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

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