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जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में गूंजेगी शहनाई! उम्रकैद के दो कैदी लेंगे सात फेरे


राजस्थान में जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में राजस्थान हाई कोर्ट ने एक ऐसा अभूतपूर्व और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने कानूनी गलियारों से लेकर सामाजिक स्तर तक एक नई मिसाल कायम की है। प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी 'ओपन जेल' परिसर के भीतर दो सजायाफ्ता दोषियों की शादी कराई जाएगी। हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने मंडोर ओपन जेल में रह रहे उम्रकैद के बंदी मूलाराम भाटी (33) को पैरोल पर बाहर चल रही उम्रकैद की ही दोषी सीमा घड़से (31) से विवाह करने की कानूनी हरी झंडी दे दी है।

न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक आदेश जारी किया। कोर्ट के इस फैसले को भविष्य में कैदियों के संवैधानिक अधिकारों, मानवीय गरिमा और उनके जीवन में सकारात्मक सुधार से जुड़े मामलों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक नजीर माना जा रहा है।

मूल रूप से नागौर के रहने वाले मूलाराम को साल 2023 में हत्या के एक मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी, जिसके बाद उन्हें मंडोर ओपन जेल शिफ्ट किया गया। वहीं, मुंबई की रहने वाली सीमा को साल 2019 में पति की हत्या के मामले में उम्रकैद मिली थी। ओपन जेल के नियमों के तहत आत्मनिर्भर बनने के लिए दोनों वहां खेती का काम करते थे। रोजमर्रा के काम के दौरान दोनों का संपर्क हुआ, बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गईं। दोनों ने इस कठिन दौर में एक-दूसरे का संबल बनने का फैसला किया। हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली, जिसके बाद दोनों ने विवाह बंधन में बंधने का निर्णय लिया।

यह अनोखी शादी आगामी 22 जुलाई को जोधपुर के मंडोर ओपन एयर कैंप परिसर के भीतर ही संपन्न होगी। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विवाह के दौरान जेल प्रशासन की सख्त निगरानी और सुरक्षा चाक-चौबंद रहेगी। इस शादी के कार्ड में एक बेहद भावुक करने वाली बात सामने आई है। वधू सीमा के पिता के स्थान पर उसकी एक सहेली के पिता का नाम लिखा गया है, जो पिता का फर्ज निभाते हुए सीमा का कन्यादान करेंगे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और स्वप्न चौहान ने पैरवी की, वहीं राज्य सरकार ने भी इस मानवीय पहलू पर कोई आपत्ति नहीं जताई। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, "विवाह करना, परिवार बसाना और गरिमापूर्ण जीवन जीना संविधान के तहत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। सजा का मकसद कैदी को केवल दंड देना नहीं, बल्कि उसके जीवन में सुधार लाना और उसे समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।"

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