बलिया। बैरिया तहसील में अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। अंशकालिक कंप्यूटर ऑपरेटर से हुए विवाद के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों सहित कई अधिवक्ताओं पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने के विरोध में गुरुवार को अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन ने एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा वापस लेने, निष्पक्ष कार्रवाई और कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो जिलेभर की तहसीलों और कलेक्ट्रेट में व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
तहसील बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ताओं ने बैरिया तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे जिले की सबसे भ्रष्ट तहसील करार दिया। उनका आरोप था कि राजस्व से जुड़े अधिकांश कार्य बिना धनराशि दिए नहीं होते और आम वादकारियों को न्याय पाने में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने कहा कि राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, लिपिक समेत कई कर्मचारी विभिन्न कार्यों के लिए धन की मांग करते हैं, जिससे आम जनता का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था से उठता जा रहा है।
बैठक के बाद अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन ने एसडीएम संजय कुशवाहा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने, अधिवक्ताओं पर दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लेने तथा संबंधित संविदाकर्मियों की सेवा समाप्त करने की मांग की। साथ ही जिलाधिकारी पर अधिवक्ताओं की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो जिले की सभी तहसीलों एवं कलेक्ट्रेट में तालाबंदी कर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि शुक्रवार को कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन, बलिया की बैठक में बैरिया सहित जिले की सभी तहसील बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जहां आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश मिश्र ने तथा संचालन महामंत्री राजकुमार तिवारी ने किया। इस दौरान देवेंद्र मिश्र, योगेंद्र पांडेय, राम प्रकाश सिंह, संजय सिंह, रुद्रदेव कुंवर, चंद्रशेखर यादव, जाकिर हुसैन, ओमकार पांडेय, अजय सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे और अपने विचार व्यक्त किए।
अधिवक्ताओं की हड़ताल का असर तहसील न्यायालयों की कार्यवाही पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कई मामलों की सुनवाई स्थगित करनी पड़ी। एसडीएम एवं नायब तहसीलदार न्यायालयों में सूचीबद्ध विभिन्न वादों की सुनवाई अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो सकी, जिससे वादकारियों को अगली तिथि का इंतजार करना पड़ा। हड़ताल के चलते न्यायिक कार्य बाधित रहने से दूर-दराज से आए लोगों को भी निराश होकर लौटना पड़ा।
