तीसरी जात पर अव्यवस्थाएं हुईं उजागर, जल निकासी की मांग तेज महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक हुई परेशानी
पीलीभीत। तहसील पूरनपुर सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र के ग्राम माती माफी स्थित प्राचीन एवं आस्था के प्रमुख केंद्र मां गूंगा देवी मंदिर में आयोजित प्रसिद्ध जात मेले की तीसरी जात सोमवार को भारी बारिश के बीच संपन्न हुई। लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई और सुबह से देर शाम तक हजारों की संख्या में भक्त मां गूंगा देवी के दरबार में दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते रहे। पूरे मंदिर परिसर में ष्जय मां गूंगा देवीष् के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ण होने की कामना की।बारिश के कारण मेला परिसर, मंदिर तक जाने वाले संपर्क मार्ग, गलियां और पार्किंग स्थल पूरी तरह जलमग्न हो गए। जगह-जगह जलभराव और कीचड़ फैलने से श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। फिसलन भरे रास्तों पर महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी हुई। कई श्रद्धालु एक-दूसरे का सहारा लेकर मंदिर तक पहुंचे, जबकि कुछ स्थानों पर लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। मेला परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहा। इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ दुकानदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई अस्थायी दुकानों के सामने पानी भर जाने से व्यापार प्रभावित हुआ, वहीं कीचड़ के कारण लोगों का आवागमन भी बाधित रहा। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां गूंगा देवी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ही उन्हें हर वर्ष यहां खींच लाती है। उनका कहना है कि बारिश और अव्यवस्थाएं आस्था के आगे छोटी पड़ गईं, लेकिन भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए बेहतर व्यवस्थाएं होना आवश्यक है। स्थानीय ग्रामीणों और मेला क्षेत्र में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रशासन एवं मेला समिति से मांग की कि मेला समाप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही कीचड़ वाले मार्गों पर मिट्टी, ईंटों का खड़ंजा या इंटरलॉकिंग सामग्री डलवाई जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन मिल सके। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, इसलिए स्थायी जल निकासी और बेहतर मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए। बारिश ने जहां मेले की व्यवस्थाओं की कमियां उजागर कर दीं, वहीं दूसरी ओर हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी मां गूंगा देवी के भक्तों के विश्वास को डिगा नहीं सकतीं। पूरे दिन मंदिर परिसर धार्मिक उल्लास, भक्ति और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर रहा।
