मेघालय का 'हनीमून मर्डर केस': सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ पुलिस पहुंची सुप्रीम कोर्ट
July 02, 2026
'हनीमून मर्डर केस' के नाम से चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में सोनम को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय पुलिस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. पुलिस ने सोनम के फरार होने का अंदेशा जताते हुए आदेश पर रोक की मांग की है. सॉलिसिटर जनरल ने मामले पर तत्काल विचार का अनुरोध किया. इसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने मामला शुक्रवार (3 जुलाई) को सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया है.
इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को सोनम से हुई थी. दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए. वहां चेरापूंजी में राजा लापता हो गए. बाद में उनकी लाश एक गहरी खाई से बरामद हुई. पुलिस ने जांच के बाद सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और अन्य सहयोगियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया. जून 2025 में उत्तर प्रदेश से सोनम को गिरफ्तार किया गया.
पुलिस ने अपनी तरफ से तेज कार्रवाई करते हुए कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. वारदात को आर्थिक फायदे के लिए सोच समझ कर की गई हत्या करार दिया, लेकिन सोनम की गिरफ्तारी के समय लापरवाही से तैयार किया गया अरेस्ट मेमो उसकी जमानत का आधार बन गया. पुलिस ने गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी में हत्या के लिए लगने वाली बीएनएस की धारा 103 की जगह धारा 403 लिख दिया गया, जबकि बीएनएस में ऐसी कोई धारा ही नहीं है. पहले प्रचलित आईपीसी में धारा 403 थी, जो कि संपत्ति के गबन से जुड़ी थी. इतना ही नहीं पुलिस ने अपने दस्तावेज में सोनम को 'सेना का भगोड़ा' तक लिख दिया.
निचली अदालत ने 28 अप्रैल 2026 को सोनम को सशर्त जमानत दे दी. कोर्ट ने इसके पीछे पुलिस की तरफ से गिरफ्तारी के दौरान की गई गंभीर लापरवाही को आधार बनाया. कोर्ट ने माना कि आरोपी को गिरफ्तारी का सही कारण न बताना संविधान के अनुच्छेद 22(1) का सीधा उल्लंघन है. राज्य सरकार ने इसे तकनीकी भूल बताते हुए हाई कोर्ट में अपील की, लेकिन 29 जून को हाई कोर्ट ने पुलिस की खिंचाई करते हुए अपील खारिज कर दी.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मेघालय पुलिस में कहा है कि गिरफ्तारी मेमो में हुई गलती किसी कर्मचारी की लापरवाही थी. उसने किसी अन्य मामले के अरेस्ट मेमो से कुछ बातें कॉपी-पेस्ट कर लीं. धारा को 103 की जगह 403 लिखना भी टाइपिंग की गलती थी. इस तरह की मामूली गलतियों को ऐसे गंभीर अपराध में जमानत का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए.
