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"द्रोणाचार्य मानते हैं कि हर पाठ उनके शिष्यों को कौशल और मूल्यों दोनों में मजबूत बनाए”- जीतन लालवानी


मुंबई: सोनी सब का शो हस्तिनापुर के वीर पांडवों और कौरवों के अनकहे बचपन की यात्रा को जीवंत करता है। इस सफर में युवा राजकुमार ऐसे सबक सीखते हैं जो उनके भविष्य को आकार देंगे। जैसे ही वे अपने जीवन के नए चरण की तैयारी कर रहे हैं, वे उस गुरु से मिलने वाले हैं जो उनके भविष्य पर गहरी छाप छोड़ेंगे।

आने वाले एपिसोड्स में गुरु द्रोणाचार्य (जितेन लालवानी) पांडवों और कौरवों के जीवन में एक शानदार प्रवेश करते हैं। पांडव एक अद्भुत दृश्य देखते हैं जब गुरु द्रोणाचार्य केवल घास की तीलियों का इस्तेमाल करके गहरे कुएँ से उनका गेंद निकाल लेते हैं। उनकी बेजोड़ कला और बुद्धिमत्ता देखकर युवा राजकुमार उनके शिष्य बनने के लिए उत्सुक हो जाते हैं। उनकी असाधारण क्षमताओं को पहचानते हुए भीष्म पितामह (मनीष वाधवा) पांडवों को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हैं गुरु द्रोणाचार्य को ढूँढकर उन्हें अपना गुरु बनने के लिए राज़ी करना। इस मिशन पर निकलते हुए भाइयों को ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो उनके साहस, दृढ़ता और एकता की परीक्षा लेती हैं।

युवा राजकुमार गुरु द्रोणाचार्य के शिष्य बनने योग्य स्वयं को कैसे सिद्ध करेंगे?

आगामी ट्रैक के बारे में बात करते हुए जितेन लालवानी ने साझा किया, “द्रोणाचार्य केवल अपने ज्ञान के लिए ही नहीं बल्कि उस अनुशासन और मूल्यों के लिए भी सम्मानित हैं जिन पर वे विश्वास करते हैं। उनके लिए शिक्षा का मतलब सिर्फ महान योद्धा तैयार करना नहीं है, बल्कि मजबूत चरित्र बनाना और अपने शिष्यों को जिम्मेदारी, एकाग्रता और आत्म-नियंत्रण का सही अर्थ समझाना है। मुझे द्रोणाचार्य की सबसे बड़ी बात यही लगती है कि वे मानते हैं कि हर सबक उनके छात्रों को कौशल और मूल्यों दोनों में मजबूत बनाए। उनका आगमन पांडवों और कौरवों के जीवन में एक अहम चरण की शुरुआत है, जहाँ हर चुनौती सीखने और आगे बढ़ने का अवसर बन जाती है।”

सोनी सब पर हस्तिनापुर के वीर देखना न भूलें, सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे।

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