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स्वास्थ्य के लिए मन का स्वस्थ होना जरूरी है-मोहन भागवत


आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में बच्चों द्वारा उठाए जा रहे आत्महत्या के कदम पर बात की। उन्होंने कहा, "ग्रंथ पढ़ने से ताकत मिलती थी, आज स्थिति क्या है, 12वीं फेल हो गए तो आत्महत्या करते हैं, घर में डांट पड़ी तो घर से भाग जाते हैं, आत्महत्या करते हैं, यह मन ऐसे कैसे हो गया।"

मोहन भागवत ने कहा, "कथाएं अभी भी हैं, उस पर फिल्में भी बनती हैं, देखते भी हैं। दादी पोता-पोती को घर में बिठाकर कहानी बताती थी, आज दादी है नहीं घर में, दूसरे घर में रहती हैं, पोते-पोती को कहानी कौन बताए। माता-पिता को मालूम नहीं है कहानी, वो TV पर छोड़ देते हैं, वो दिखाएंगे, वह गूगल बाबा पर दे देती हैं, हमारे पोता-पोती को संभालो, बच्चा रो रहा है तो दे दिया मोबाइल बचपन से।"

मोहन भागवत ने कहा, "स्वास्थ्य के लिए मन का स्वस्थ होना जरूरी है। शरीर बिगड़ा है तो शरीर को तो कमजोर करता ही है लेकिन मन को भी कमजोर करता है। जो व्यक्ति अस्वस्थ होता है, वह जल्दी गुस्सा करता है।"

मोहन भागवत ने कहा, "मन ही मनुष्य के मोक्ष का कारण है, मनुष्य या कोई भी जीव पैदा होता है तो उसका पहले मन पैदा होता है। मन अनुभव से बनता है, अच्छे अनुभव आते रहें तो अच्छा मन बनता है। सकारात्मक विचार किया तो सुरक्षित मन बनता है। नकारात्मक विचार किया तो विंध्यवंशक मन बनता है, यह मन वहां से शुरू होता है, इसीलिए मनुष्य के विकास के लिए पहले से अंत तक मन रहता है, मन बनता है- मन बिगड़ता है।"

मोहन भागवत ने कहा, "अपने पास जो साइकोलॉजी का विचार है, वह पश्चिम से आया है। पश्चिम से आया है ये बात मैं खराब अर्थ में नहीं कह रहा। मॉडर्न साइकोलॉजी के आधार पर हम पढ़ते हैं और उसके प्रयोग करते हैं, ये अच्छी बात है। लेकिन साइकोलॉजी में अभी भी पूर्ण और समग्र विचार कहां हुआ है, ऐसा पूछेंगे तो, मन की सारी चिकित्सा, हमारे देश में, परंपरा से है।"

मोहन भागवत ने कहा, "किसी भी शास्त्र का विकास होता है तो उसमें पूर्णता आती है। मानव का कल्याण होता है। ज्ञान में पूर्णता आ गई तो मनुष्य का कल्याण है। आज सारी बातें घर की हम, संस्था को सौंप रहे हैं, अस्पताल को सौंप रहे हैं, सरकार को सौंप रहे हैं, घर का हाथ का खाना, स्वस्थ खाना खाकर जो समाधान मिलता है, वो बाहर के खाने से नहीं मिलता। स्वास्थ्य की गारंटी नहीं रहती उसमें, कोई न कोई कमी निकल ही जाती है। हम लोग अस्वस्थ तरीका जानबूझकर अपना रहे हैं।"

मोहन भागवत ने कहा, "मनुष्य की स्व निर्भरता भी कम हो रही है, एक अस्वस्थ तरीके पर उसको जाना पड़ रहा है, इसको ठीक करना है तो, अपने घर में भी ये मन बनाने का काम होना चाहिए ठीक से।

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