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प्रतापगढः गंगा एक्सप्रेसवे के लिए खोदे गए तालाब में एक युवक की और हुई मौत


प्रतापगढ़/बाबागंज। गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण में मिट्टी खनन के नाम पर खोदे गए गहरे तालाब एवं गड्ढे एक बार फिर जानलेवा साबित हुए हैं। महेशगंज थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह 35 वर्षीय युवक का शव ऐसे ही एक तालाब में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। यह कोई पहला हादसा नहीं है। इससे पहले भी अत्यधिक गहराई तक की गई खुदाई के कारण तीन लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीआरओ द्वारा केवल दो मीटर तक खुदाई की अनुमति दिए जाने के बावजूद ठेकेदारों ने राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से मानक से कई गुना अधिक गहराई तक तालाब से मिट्टी खोदकर निकाल लिया था, जो अब मौत का कारण बन रहे हैं।

थाना क्षेत्र के राजबहादुर के 35 वर्षीय पुत्र धीरेंद्र कुमार गौतम का शव मंगलवार सुबह कांटेजोत और अहलादगंज के बीच गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए मिट्टी खनन के दौरान खोदे गए  तालाब में उतराता मिला। शव मिलने की सूचना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई और परिजनों में कोहराम मच गया।

बताया गया कि धीरेंद्र सोमवार शाम करीब पांच बजे घर से निकला था लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने उक्त गहरे तालाब में एक शव उतराता देखा। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने उसकी पहचान धीरेंद्र कुमार गौतम के रूप में की।

मौत की खबर मिलते ही मृतक की मां श्यामा देवी और बहन सुनीता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना मिलने पर महेशगंज पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

थानाध्यक्ष संदीप कुमार तिवारी ने बताया कि तालाब में एक शव मिला है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गई खुदाई पहले भी कई परिवारों की खुशियां उजाड़ चुकी है।  चेतरा गांव निवासी धर्मराज यादव की ठेकेदारों द्वारा खोदे गए नाले में डूबने से मौत हुई तो मलकिया गांव निवासी लवकुश तिवारी की भी ऐसे ही गहरे तालाब में डूबकर जान चली गई। वहीं बदगवां गांव निवासी अयोध्या प्रसाद की भी अत्यधिक गहराई तक खोदे गए जलभराव वाले तालाब में डूबने से मौत हो चुकी है। स्थानीय लोगो का कहना है कि सीआरओ द्वारा दो मीटर की गहराई तक की खुदाई की अनुमति देने के बाद ठेकेदारों द्वारा मानक से अधिक खुदाई की गई और सुरक्षा के उपाय नही किए गए जिससे ग्रामीणों की मौत का सिलसिला जारी है।

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