सुल्तानपुर। सरकार कहती है ष्जीरो टॉलरेंसष्, लेकिन विकास खंड दोस्तपुर के ग्राम नारामधईपुर में प्रशासन का रवैया ष्फुल टॉलरेंसष् वाला नजर आ रहा है! स्वर्गीय चंद्रभान शर्मा और धर्मेंद्र शर्मा के घर के ठीक पीछे स्थित ऊसर खाते की जमीन पिछले दो साल से विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक निकम्मेपन की गवाह बनी हुई है। दो साल से न तो यहाँ एक फावड़ा चला, न सफाई हुई और न ही सुंदरीकरण का कोई काम हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक के चक्कर काटे जा चुके हैं। हर बार शिकायत दर्ज होती है, साहब लोग गंभीर चेहरा बनाकर रिपोर्ट लिखते हैं, और फिर... फाइल पर धूल जमने के लिए छोड़ दी जाती है।यों का परमानेंट डायलॉगरू ष्जल्द ठीक कर दिया जाएगा।
जल संरक्षण के बड़े-बड़े दावों के बीच, इस जमीन के मिसमैनेजमेंट के कारण बरसात का पानी इकट्ठा ही नहीं हो पाता। नतीजा? तपती गर्मी और उमस में बेजुबान पशु-पक्षी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
सांप-बिच्छुओं का श्घरश्रू सफाई के अभाव में यहाँ गंदगी, मलबे और कीचड़ का साम्राज्य है। यह जगह अब जहरीले सांपों और बिच्छुओं का ब्रीडिंग ग्राउंड बन चुकी है।
घरों में दहशत ये जहरीले जीव अब ग्रामीणों के घरों में घुस रहे हैं। लोग रात-रात भर जागकर अपने बच्चों और मवेशियों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
जनता का तीखा सवाल हादसे के बाद जागेंगे साहब?
- आखिर यह लापरवाही कब तक चलेगी?’
- क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
- कागजों पर फाइलें बंद करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी
एक तरफ सरकार तालाबों के जीर्णोद्धार और अमृत सरोवर जैसी योजनाओं पर करोड़ों पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी तरफ दोस्तपुर का यह ऊसर खाता सिस्टम की पोल खोल रहा है। ग्राम नारामधईपुर के निवासी अब सिर्फ खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर सख्त और तुरंत कार्रवाई चाहते हैं।
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद भी जिला प्रशासन फाइलों में ही उलझा रहता है या धरातल पर उतरकर ग्रामीणों को इस श्जहरीले जालश् से मुक्ति दिलाता है! वहीं मामले में वार्ता करने पर ठक्व् दोस्तपुर जिम्मेदारी से बचते नजर आए और क्च्त्व् ने जांच के निर्देश दिए।
