बरखेड़ा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बरखेड़ा में तैनात संविदा चिकित्सक डॉ. शिवम राठौड़ एक बार फिर अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में आ गए हैं। इस बार मामला ड्यूटी के दौरान अस्पताल से अनुपस्थित रहने का सामने आया है, जिसके कारण सड़क दुर्घटना में घायल दंपति को समय पर प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल सका। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, बरखेड़ा क्षेत्र के गांव भैंसाह ग्वालपुर निवासी प्रेमपाल अपनी पत्नी फूलमती के साथ मोटरसाइकिल से अपनी ससुराल से वापस घर लौट रहे थे। रास्ते में अचानक उनकी बाइक के सामने एक आवारा कुत्ता आ गया। कुत्ते को बचाने के प्रयास में बाइक अनियंत्रित होकर सड़क पर गिर गई, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
इसी दौरान वहां से गुजर रही यूपी-112 पुलिस टीम ने मानवता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरखेड़ा पहुंचाया, ताकि उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता मिल सके। लेकिन आरोप है कि अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात संविदा चिकित्सक डॉ. शिवम राठौड़ उस समय अस्पताल में मौजूद नहीं थे।
घायल प्रेमपाल ने बताया कि अस्पताल में केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद था। चिकित्सक के न होने के कारण न तो उनका प्राथमिक उपचार किया गया और न ही आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किए गए। कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों को सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
वर्तमान में प्रेमपाल और फूलमती का जिला अस्पताल के सर्जरी वार्ड में उपचार चल रहा है। परिजनों का आरोप है कि यदि बरखेड़ा सीएचसी में समय पर डॉक्टर मौजूद होते तो घायलों को तत्काल इलाज मिल जाता और उन्हें बिना उपचार रेफर करने की नौबत नहीं आती।
मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. बी.सी. पंत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है। ड्यूटी के दौरान चिकित्सक के अनुपस्थित रहने की शिकायत पर संविदा चिकित्सक डॉ. शिवम राठौड़ को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य विभाग की इमरजेंसी सेवाओं को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन यदि इमरजेंसी के समय डॉक्टर ही अस्पताल में मौजूद न रहें तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार चिकित्साकर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने और अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं को प्रभावी बनाने की मांग की है।
