44 मेधावियों को स्वर्ण पदक, कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित हुईं नंदिनी वर्माय उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने युवाओं से रोजगार पाने के साथ रोजगार सृजक बनने का किया आह्वान
बलिया। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय का अष्टम दीक्षांत समारोह बुधवार को गरिमामय वातावरण में विश्वविद्यालय परिसर स्थित दीक्षांत मंडप में संपन्न हुआ। समारोह में शिक्षा, संस्कार, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प की गूंज सुनाई दी। अध्यक्षता कर रहीं प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों से केवल नौकरी पाने तक अपनी सोच सीमित न रखने, बल्कि रोजगार सृजक बनने का आह्वान किया। वहीं मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह ने शोध को प्रयोगशालाओं से खेतों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह में 44 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 35 छात्राएं और नौ छात्र शामिल रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। शिक्षा मनुष्य में संवेदनशीलता, आत्मानुशासन, नैतिकता, सेवा भावना, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करती है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में भारतीय शिक्षा दर्शन की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि आज बेटियां शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, रक्षा, चिकित्सा, खेल, साहित्य, न्यायपालिका और उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं और राष्ट्र की प्रगति में उनकी भागीदारी निर्णायक है।
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह, पूर्व निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने विद्यार्थियों को दीक्षोपदेश देते हुए कहा कि वर्तमान समय ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का युग है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ उसके शिक्षित, कुशल और नवाचारी युवाओं में निहित होती है। उन्होंने कहा कि अब समय केवल प्रयोगशालाओं तक शोध सीमित रखने का नहीं, बल्कि उसे खेतों तक पहुंचाने का है। विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी ही विकसित भारत की आधारशिला बनेगी। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि जैसी आधुनिक तकनीकों को भविष्य की कृषि और ग्रामीण विकास का आधार बताया।
विशिष्ट अतिथि एवं राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल. जानी ने कुलाधिपति का संदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी इच्छाओं से पहले योग्यता अर्जित करने की सीख देते हुए कहा कि भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को अपनी संस्कृति, संस्कार और मातृभूमि से जुड़कर विज्ञान, तकनीक, शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने गुरुजनों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि गुरु के बिना ज्ञान अधूरा रहता है।
कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार शुक्ल ने स्वागत भाषण देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की विकास योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया। समारोह के दौरान जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सरिता पाण्डेय ने किया।
समारोह में निवर्तमान कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, कार्य परिषद एवं विद्या परिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, प्रबंधक, वित्त अधिकारी आनंद दुबे, कुलसचिव एस.एल. पाल सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
-दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 44 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। एमएससी रसायन विज्ञान की छात्रा नंदिनी वर्मा को पूरे विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने पर कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वहीं प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की छात्रा विनीता सिंह को डॉ. काशी प्रसाद जायसवाल स्मृति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 35 छात्राएं और 9 छात्र शामिल रहे, जिसने एक बार फिर उच्च शिक्षा में बेटियों की उत्कृष्ट उपलब्धि को रेखांकित किया।
-दीक्षांत समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय की स्मारिका श्सृजनश्, त्रैमासिक समाचार पत्रिका श्अन्वीक्षण (द क्वेस्ट)श् तथा चार शोधपरक पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही सामाजिक सरोकार निभाते हुए प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पुस्तकें, स्टेशनरी एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री से युक्त किट वितरित की गईं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ति्रयों को भी 200 शिक्षण किट प्रदान किए गए, जिनमें बच्चों के प्रारंभिक शिक्षण और खेल आधारित गतिविधियों से संबंधित सामग्री शामिल थी।
