- प्रशासन के पुनर्विवेचना के आश्वासन पर उतरी नीचेय पुलिस और पीड़िता के दावे आमने-सामने
पीलीभीत। सुनगढ़ी थाना क्षेत्र में शुक्रवार को न्याय की मांग को लेकर हुए एक अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। छेड़छाड़, मारपीट और अभद्रता के मामले में पुलिस द्वारा न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट दाखिल किए जाने से नाराज एक युवती करीब 50 फीट ऊंचे पुराने टेलीफोन के टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फूले रहे। बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
युवती का आरोप है कि उसने जहानाबाद थाना क्षेत्र के कुछ गैर-समुदाय के लोगों के खिलाफ छेड़छाड़, मारपीट और अभद्रता का मुकदमा दर्ज कराया था। उसके मुताबिक आरोपियों ने सार्वजनिक स्थान पर उसके साथ मारपीट की, कपड़े तक फाड़ने का प्रयास किया और अभद्र व्यवहार किया। इसके बावजूद पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से आरोपियों से मिलीभगत कर मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसी से आहत होकर उसने टावर पर चढ़कर न्याय की गुहार लगाई।
टावर पर बैठी युवती ने साफ चेतावनी दी कि यदि उसे जबरन नीचे उतारने की कोशिश की गई या न्याय नहीं मिला तो वह कूदकर अपनी जान दे देगी। इस चेतावनी के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी, पुलिस बल और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई घंटे तक लगातार समझाने-बुझाने का प्रयास चलता रहा। अधिकारियों ने युवती को भरोसा दिलाया कि उसकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाएगा और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि न्यायालय में दाखिल फाइनल रिपोर्ट हटाकर मामले की पुनर्विवेचना कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो सभी आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद युवती टावर से नीचे उतरने के लिए राजी हुई। सुरक्षित नीचे उतरने के बाद पुलिस उसे क्षेत्राधिकारी (सिटी) कार्यालय ले गई, जहां उससे पूछताछ की गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
घटना के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। पूरे घटनाक्रम के दौरान लोगों में पुलिस की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
वहीं, क्षेत्राधिकारी सदर नताशा गोयल ने पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला छेड़छाड़ का नहीं बल्कि सड़क दुर्घटना के बाद हुए विवाद का प्रतीत हुआ। उनके अनुसार युवती स्कूटी चलाते समय रील बना रही थी, इसी दौरान दुर्घटना हुई और बाद में दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। दुर्घटना से जुड़े मामले में आवश्यक कार्रवाई की गई, जबकि छेड़छाड़ के आरोपों की जांच में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। इसी आधार पर न्यायालय में फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।हालांकि, युवती के टावर पर चढ़ने और पूरे घटनाक्रम के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को दोबारा गंभीरता से लेते हुए पुनर्विवेचना कराने का निर्णय लिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या वास्तव में पीड़िता को न्याय मिल पाता है।यह घटना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि पुलिस विवेचना की निष्पक्षता, संवेदनशील मामलों के निस्तारण और पीड़ितों के न्याय के अधिकार पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। यदि किसी पीड़ित को अपनी बात सुनवाने के लिए 50 फीट ऊंचे टावर पर चढ़ना पड़े, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। अब सभी की निगाहें पुनर्विवेचना और उसके निष्कर्ष पर टिकी हैं।
