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लखनऊः 25 किलोवाट का औद्योगिक कनेक्शन, न फायर एनओसी... न मीटर! अमौसी जोन के नादरगंज खंड में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका


लखनऊ। राजधानी के अमौसी जोन के नादरगंज खंड में 25 किलोवाट के औद्योगिक विद्युत कनेक्शन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित परिसर में फायर विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (छव्ब्) और विद्युत मीटर जैसी अनिवार्य औपचारिकताओं के बिना ही कनेक्शन जारी कर दिया गया। इस पूरे मामले ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 25 किलोवाट का औद्योगिक कनेक्शन जारी किया गया, तो क्या विभाग ने सुरक्षा मानकों का पालन कराया? यदि फायर एनओसी और मीटर जैसी आवश्यक शर्तें पूरी नहीं थीं, तो आखिर किसके आदेश पर कनेक्शन स्वीकृत किया गया?

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राजधानी हाल ही में हुए अलीगंज अग्निकांड की भयावह घटना को अभी भूली नहीं है। उस हादसे ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणाम दिखाए थे। इसके बावजूद यदि नियमों को ताक पर रखकर कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं, तो यह भविष्य में किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आ सकती है। सवाल यह भी है कि क्या औद्योगिक कनेक्शन जारी करने में विभागीय नियमों को दरकिनार किया गया और क्या इसके पीछे आर्थिक लेन-देन का खेल हुआ?

सूत्रों की माने तो पूरे  मामले में 4रू 50 लाख रूपों का लेनदेन हुआ तथा उपभोक्ता को 1,74000 की रसीद दी गई । पहले उपभोक्ता के परिसर पर ट्रांसफार्मर रखने का निर्णय लिया गया था फिर पड़ोस में स्थापित 25 केवीए के ट्रांसफार्मर के स्थान पर लगभग 100 का ट्रांसफार्मर स्थापित कर वहीं से संयोजन जारी कर दिया गया

विधान केसरी इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल कर रहा है। यदि आरोप सही पाए गए तो यह अमौसी जोन के सबसे बड़े विद्युत घोटालों में से एक साबित हो सकता है।

उठ रहे अहम सवाल

  • क्या बिना फायर एनओसी के औद्योगिक कनेक्शन जारी किया गया?
  • यदि मीटर नहीं लगा, तो बिजली आपूर्ति किस आधार पर की जा रही है?
  • किस अधिकारी ने नियमों को दरकिनार कर स्वीकृति दी?
  • क्या अलीगंज अग्निकांड के बाद भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है?
  • क्या पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होगी?

जिम्मेदार बने अनजान

वर्टिकल व्यवस्था के  खौफनाक सच सच का यह जीवन्त उदाहरण है । जहां पर अधिशासी अभियंता नादरगंज अमित कुमार आनंद ने कहा मैंने इस प्रकार के किसी संयोजन को मंजूरी नहीं दी ।

उपखंड अधिकारी संदीप कुमार वर्मा ने कहा मेरी जानकारी में मामला नहीं है बिना मीटर के यदि सप्लाई जारी है तो विजिलेंस अपना काम करेगी नियमानुसार उस पर मुकदमा दर्ज होगा   परंतु यह एक दिलचस्प पहलू है कि आखिर 10 दिनों से निरंतर लाइन चल रही है क्षेत्रीय लाइनमैन टेक्नीशियन पेट्रोलिंग मैन किसी को मुख्य मार्ग पर इस परिसर पर इतना बड़ा संयोजन कैसे नहीं दिखाई दिया

बड़ा सवाल है एक तरफ वर्टिकल व्यवस्था के तहत प्रत्येक उपकेंद्र  पर कार्मिक एवं संसाधन सीमित है वहां पर आखिर किस कार्मिक द्वारा किस क्षेत्र में वैध एवं अवैध संयोजन  परिसर पर स्थापित किया जा रहा है इसकी जानकारी अधिकारियों को नहीं है मामले की गंभीरता और भी बढ़ जाती है कि 3 फेस का हाई टेंशन लाइन से कनेक्शन मामूली इलेक्ट्रीशियन अथवा उपभोक्ता स्वयं तो नहीं बांध सकता 

राजस्व की भारी क्षति

यदि वास्तव में जिम्मेदार अनजान है तो पूरे क्षेत्र में जो की एक वृहद क्षेत्रफल वाला है इस प्रकार के कितने अवैध संयोजन चल रहे हैं जिनसे राजस्व की क्षति हो रही है।

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