भंडाफोड़! इंडिया पोस्ट के जरिए दवाई बताकर गांजे की होम डिलीवरी, 21 राज्यों में फैला था नेटवर्क
July 03, 2026
तेलंगाना के हैदराबाद में पुलिस ने ड्रग्स की तस्करी करने वाले एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो कथित तौर पर 21 राज्यों में ग्राहकों तक गांजा पहुंचाने के लिए इंडिया पोस्ट के स्पीड पोस्ट नेटवर्क और प्राइवेट कूरियर सर्विस का इस्तेमाल करता था। इस मामले से एक ऐसा डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल सामने आया है जिसमें खरीदारों के घर तक पोस्टल पार्सल के जरिए ड्रग्स पहुंचाई जाती थी।
इस मामले की जांच हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग (H-NEW) ने की। जांच तब शुरू हुई तब अधिकारियों ने झारखंड के इसरी बाजार पोस्ट ऑफिस से हैदराबाद के एक ग्राहक के नाम बुक किया गया गांजे का पार्सल पकड़ा। बाद में जांच में फुसरो बाजार पोस्ट ऑफिस से भेजे गए एक और कंसाइनमेंट का पता चला, जिससे जांचकर्ताओं को देशव्यापी नारकोटिक्स नेटवर्क का खुलासा करने में मदद मिली।
आरोप है कि यह सिंडिकेट रोजाना 80-100 ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करता था और 8-10 स्पीड पोस्ट पार्सल भेजता था। हर पार्सल में 50-250 ग्राम गांजा होता था, जिसकी कीमत 1 हजार 500 से 8 हजार रुपये के बीच होती थी। पुलिस का अनुमान है कि इस धंधे से रोजाना लगभग 1 लाख रुपये की कमाई होती थी, जिससे महीने का टर्नओवर 30-35 लाख रुपये और सालाना कमाई 4-5 करोड़ रुपये तक पहुंचती थी।
इस मामले में एक आरोपी, सत्यम मिश्रा, को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसके साथी शुभम मिश्रा उर्फ शुभम दादा, राहुल झा, सचिन मिश्रा और संतोष पंडित, फरार हैं। गुडीमलकापुर और एसआर नगर पुलिस स्टेशन के इलाकों में अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने हैदराबाद के दो खरीददारों, सुशांत व्यास और लड्डू, को भी गिरफ्तार किया और उनके पास से 2 किलो गांजा जब्त किया।
जांच के अनुसार, यह सिंडिकेट स्पीड पोस्ट और कूरियर सर्विस के जरिए गांजा भेजता था और पार्सल को ट्रेन और एयर कार्गो से भेजता था। हैदराबाद भेजे जाने वाले पार्सल हवाई मार्ग से भेजे जाते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने पार्सल की स्क्रीनिंग में मौजूद कमियों का फायदा उठाया और पकड़े जाने से बचने के लिए पार्सल में मौजूद सामान को दवाइयां बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर VC सज्जनार ने बताया कि यह सिंडिकेट झारखंड में स्थानीय स्तर पर उगाए गए गांजे के साथ-साथ बाहरी सप्लायर्स से भी गांजा हासिल करता था और फिर इसे तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और कर्नाटक समेत लगभग 21 राज्यों में बांटता था।
पुलिस ने बताया कि सत्यम मिश्रा ने आर्थिक तंगी के कारण अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई छोड़ दी थी। उसने पहले पेंटर और बाद में कमर्शियल ड्राइवर के तौर पर काम किया और 2018 में उसे गांजे की लत लग गई। आरोप है कि वह और उसका भाई शुभम मिश्रा ड्रग्स के धंधे में उतर गए और धीरे-धीरे दूसरे लोगों को शामिल करके एक संगठित नेटवर्क बना लिया।
जांच में पता चला कि सत्यम और शुभम पैकेजिंग का काम संभालते थे, जबकि राहुल झा पार्सल की बुकिंग और उन्हें भेजने का काम करता था, ऑर्डर वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लिए जाते थे और पेमेंट UPI के जरिए लिया जाता था।
मुंबई में, इस ग्रुप का कथित तौर पर 1 हजार से ज्यादा रेगुलर ग्राहकों का नेटवर्क था। झारखंड से ट्रेन के जरिए बड़ी खेप मंगाई जाती थी, जिसे सचिन मिश्रा और संतोष पंडित के घरों में रखा जाता था और बाद में लोकल लेवल पर बांटने के लिए दोबारा पैक किया जाता था। आरोपी कथित तौर पर ड्रग्स की अलग-अलग मात्रा के लिए "मैंगो", "स्टिक" और "फ्लावर" जैसे कोड शब्दों का इस्तेमाल करते थे।
