हर साल आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष के दौरान योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 10 जुलाई को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, इस साल योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। आपको बता दें जब एकादशी दो दिनों की पड़ती है तब पहले दिन ग्रहस्थ लोग व्रत रखते हैं और दूसरे दिन वैष्णव संप्रदाय व्रत रखते हैं। तो 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग योगिनी एकादशी का व्रत करेंगे।
योगिनी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 04:41 ए एम से 05:24 ए एम
प्रातः सन्ध्या- 05:03 ए एम से 06:07 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 12:17 पी एम से 01:10 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:49 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 07:19 पी एम से 07:41 पी एम
योगिनी एकादशी पारण 2026 का समय
योगिनी एकादशी का पारण 11 जुलाई 2026 को किया जाएगा। बता दें कि पारण का अर्थ होता है व्रत खोलना। योगिनी एकादशी पारण के लिए उत्तम समय दोपहर 2 बजकर 3 मिनट से शाम 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर रहेगा। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं किया जाता है।
योगिनी एकादशी व्रत का महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत करने से सारे पाप मिट जाते हैं और जीवन में समृद्धि और खुशियों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करना अठ्यासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल मिलता है।
प्रातः सन्ध्या- 05:03 ए एम से 06:07 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 12:17 पी एम से 01:10 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:56 पी एम से 03:49 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 07:19 पी एम से 07:41 पी एम
योगिनी एकादशी पारण 2026 का समय
योगिनी एकादशी का पारण 11 जुलाई 2026 को किया जाएगा। बता दें कि पारण का अर्थ होता है व्रत खोलना। योगिनी एकादशी पारण के लिए उत्तम समय दोपहर 2 बजकर 3 मिनट से शाम 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर रहेगा। एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान नहीं किया जाता है।
योगिनी एकादशी व्रत का महत्व
योगिनी एकादशी का व्रत करने से सारे पाप मिट जाते हैं और जीवन में समृद्धि और खुशियों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत करना अठ्यासी हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल मिलता है।
