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Sonebhadra: प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को गिनाने पहुंचे थे 5 योजनाओं को बताने में इधर उधर देखने लगे।

प्रेस वार्ता के दौरान जिले में अवैध अस्पतालों के संचालन और वहां हो रही मौतों का मुद्दा भी उठा। इस पर मंत्री का जवाब भी चर्चा का विषय बन गया। 

सोनभद्र । दौरे पर आए प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा की प्रेस वार्ता उस वक्त चर्चा का विषय बन गई जब पत्रकारों ने उनसे सरकार की पांच प्रमुख उपलब्धियां गिनाने को कहा। सवाल सुनते ही मंत्री असहज नजर आए और जवाब देने के लिए बगल में बैठे नेताओं की ओर देखते दिखाई दिए। इतना ही नहीं जिले में अवैध अस्पतालों में हो रही मौतों, लगातार घट रहे वन क्षेत्र और पावर प्रोजेक्ट के लिए होने वाले लाखों पेड़ों के कटान जैसे गंभीर मुद्दों पर भी मंत्री के जवाब सवालों के घेरे में रहे। सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर पूछे गए सवालों से बचते नजर आए प्रभारी मंत्री। सर्कीट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को गिनाने पहुंचे थे। लेकिन जब पत्रकारों ने उनसे सीधे तौर पर सरकार की पांच प्रमुख उपलब्धियां बताने को कहा तो मंत्री कुछ पल के लिए असहज हो गए। सवाल का जवाब देने के लिए वह इधर-उधर देखते नजर आए और बगल में बैठे सदर विधायक भूपेश चौबे सहित अन्य लोगों से जानकारी लेने के बाद किसी तरह जवाब दे सके। प्रेस वार्ता के दौरान जिले में अवैध अस्पतालों के संचालन और वहां हो रही मौतों का मुद्दा भी उठा। इस पर मंत्री का जवाब भी चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने कहा कि जब कोई बीमार होता है तभी अस्पताल जाता है और यदि किसी अस्पताल में अनियमितता या अवैध संचालन की शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अवैध अस्पतालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई का भरोसा भी दिया। वहीं जब पत्रकारों ने भारतीय वन सर्वे की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा कि सोनभद्र में वन क्षेत्र का रकबा 133 वर्ग किलोमीटर तक कम हो गया है तो मंत्री इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने सरकार द्वारा चलाए जा रहे एक पेड़ मां के नाम अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कराया जा रहा है। मंत्री ने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में लगभग ग्यारह करोड़ पौधे लगाए गए हैं। इसी दौरान जिले में प्रस्तावित करीब साढ़े तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे बड़े पावर प्रोजेक्ट और उसके लिए लाखों पेड़ों के संभावित कटान का सवाल भी सामने आया। लेकिन इस मुद्दे पर भी प्रभारी मंत्री सीधे जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने फिर वृक्षारोपण अभियान का हवाला देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एक पेड़ मां के नाम लगाया जा रहा है।
हालांकि प्रभारी मंत्री ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि जिले में आयोजित चौपालों के दौरान बेहद कम शिकायतें और मांगें सामने आई हैं। उनके मुताबिक यह इस बात का संकेत है कि सरकार और संगठन मिलकर बेहतर कार्य कर रहे हैं और आने वाले समय में व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी उन्होंने शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का दावा किया और कहा कि जहां समस्याएं हैं उन्हें चिन्हित कर दूर कराया जाएगा।
लेकिन प्रेस वार्ता में सरकार की उपलब्धियों से ज्यादा चर्चा उन सवालों की रही जिन पर प्रभारी मंत्री स्पष्ट जवाब देने के बजाय बचते नजर आए। अवैध अस्पतालों में मौत, घटते जंगल और लाखों पेड़ों के कटान जैसे मुद्दों पर उठे सवालों ने प्रेस वार्ता को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से सुर्खियों में ला दिया।

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