उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका, अब MLC सचिन अहीर ने थामा शिंदे गुट का दामन
June 30, 2026
महाराष्ट्र की राजनीति से एक और बड़ी खबर सामने आई है। उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका लगा है। शिवसेना-यूबीटी के विधान परिषद सदस्य (MLC) सचिन अहीर, उद्धव गुट का दामन छोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं।
इस दलबदल के तुरंत बाद शिंदे गुट की ओर से उन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाते हुए उनका नामांकन भी दाखिल कर दिया गया है। इस घटनाक्रम को एकनाथ शिंदे के 'ऑपरेशन टाइगर' के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले, उद्धव ठाकरे की पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अचानक उनका साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो गए थे। इसे 'ऑपरेशन टाइगर' कहा गया, क्योंकि राजनीति में जब किसी पार्टी के नेताओं को गुपचुप तरीके से अपनी तरफ मिलाया जाता है, तो उसे अक्सर कोई कोड नेम दिया जाता है। इस बार इसे 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया।
कानून के मुताबिक, अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई नेता एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता रद्द नहीं होती। उद्धव के 9 में से 6 सांसद यानी पूरे 2/3 अलग हुए हैं, इसलिए इन सांसदों की कुर्सी सुरक्षित है।
हालांकि, उद्धव ठाकरे ने रविवार को परभणी में एक रैली को संबोधित करते हुए बागी सांसदों को तुरंत अयोग्य घोषित करने की मांग की। उद्धव ठाकरे ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़ी राजनीतिक साजिश करार देते हुए इसे 'ऑपरेशन देवेंद्र' नाम दिया और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर आरोप लगाए।
उद्धव ठाकरे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से दल-बदल विरोधी कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा, "अगर इस देश में कानून का राज है, तो इन छह सांसदों को तुरंत अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए। मुझे अब भी लोकसभा अध्यक्ष पर भरोसा है। हम उनके अधिकार का सम्मान करते हैं, उनकी निजी इच्छाओं का नहीं। अगर वे खुद कानून का पालन नहीं करेंगे, तो दूसरों से इसकी उम्मीद कैसे कर सकते हैं?"
ठाकरे ने बताया कि उनके वफादार सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र सौंपकर अपना पक्ष रखने का समय मांगा है। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सुनवाई की तारीख पहले होने के कारण पार्टी सांसद अरविंद सावंत को अपना कारगिल का आधिकारिक दौरा बीच में ही छोड़कर लौटना पड़ा।
