दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा सिंह IP हॉल ऑफ़ फ़ेम में शामिल होने वाली पहली भारतीय जज बनीं
June 25, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह को इंटरनेशनल IP हॉल ऑफ़ फ़ेम 2026 में शामिल किया गया है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय जज को इसमें सम्मानित किया है। यह सम्मान जस्टिस प्रतिभा सिंह को 16 जून को अमेरिका (US) के कैलिफ़ोर्निया के सैन डिएगो में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया गया।
जस्टिस सिंह को भारत में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) कानून के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती इनोवेशन वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक में IP कानून के विकास स्पष्टता और विश्वसनीयता में अहम भूमिका निभाई है।
IAM की एडिटर रेचल माउंटेन ने कहा कि जस्टिस प्रतिभा का प्रभाव कोर्टरूम से कहीं आगे तक फैला हुआ है। जस्टिस सिंह ने भारत की राष्ट्रीय IPR पॉलिसी के विकास में योगदान दिया और अब वह WIPO के जजों के एडवाइजरी बोर्ड की चेयरपर्सन के तौर पर काम कर रही हैं। बता दें कि IAM एक प्रमुख IP पब्लिकेशन है जो 2006 से हर साल IP हॉल ऑफ़ फ़ेम में शामिल होने वालों के नामों की घोषणा करता रहा है।
अपने संबोधन में जस्टिस प्रतिभा ने इस सम्मान के लिए IAM का आभार जताया। इसे 'विनम्रता का अनुभव' (humbling experience) बताते हुए उन्होंने कहा कि वह यह अवॉर्ड अपने परिवार और दोस्तों को समर्पित करना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह इसे दिल्ली हाई कोर्ट और पूरे देश को समर्पित करना चाहती हैं। जस्टिस प्रतिभा सिंह ने कहा, "यह वाकई बहुत ही विनम्रता का क्षण है कि हॉल ऑफ़ फ़ेम एकेडमी ने मुझे इस अहम नॉमिनेशन के लिए चुना है। मेरा मानना है कि IP हॉल ऑफ़ फ़ेम में मेरा शामिल होना IP के क्षेत्र में भारत की लीडरशिप को मान्यता मिलना है।
IP हॉल ऑफ़ फ़ेम का मकसद उन लोगों को सम्मानित करना है जिन्होंने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) कानून के विकास में बेहतरीन योगदान दिया है। इसमें शामिल होने वालों का चयन एक कड़े नॉमिनेशन और पीयर-रिव्यू प्रोसेस के ज़रिए किया जाता है, जिसमें ग्लोबल IP कम्युनिटी शामिल होती है।
