लखनऊ। एक तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अधिकारियों को जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण और भ्रष्टाचार पर श्जीरो टॉलरेंसश् की नीति अपनाने का सख्त निर्देश देते हैं, वहीं दूसरी तरफ राजधानी लखनऊ के भ्रष्ट अफसर सरकार की छवि को धूमिल करने और मुख्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ाने पर आतुर नजर आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वीवीआईपी इलाके कैसरबाग से एक बेहद डरावनी और सरकारी लापरवाही की पराकाष्ठा बयां करती तस्वीर सामने आई है। कैसरबाग चैराहे के समीप, प्लास्टिक फर्नीचर की दुकानों के ठीक सामने, बिजली विभाग और नगर निगम (जलकल) की घोर लापरवाही के कारण स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों की जान दांव पर लगी हुई है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि यहाँ कभी भी एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता है, लेकिन दोनों ही विभाग कानों में तेल डालकर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, कैसरबाग चैराहे के पास बिजली विभाग द्वारा एक बड़ा ट्रांसफार्मर लगाया गया है। इसी भारी-भरकम ट्रांसफार्मर के ठीक नीचे जलकल विभाग की एक मुख्य पानी की पाइपलाइन पिछले लगभग 10 महीनों से फटी हुई है। पाइपलाइन से लगातार हो रहे जलभराव और पानी के रिसाव के कारण ट्रांसफार्मर के नीचे की जमीन धीरे-धीरे खोखली होकर धंस रही है। भारी और हाई-वोल्टेज बिजली का ट्रांसफार्मर कभी भी धंसी हुई जमीन के कारण मलबे में तब्दील हो सकता है। पानी और बिजली का यह खतरनाक मेल न सिर्फ दुकानदारों बल्कि रोजाना यहाँ से गुजरने वाले हजारों राहगीरों के लिए श्मौत का जालश् बना हुआ है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे पिछले 10 महीनों से लगातार डर के साए में जीने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर संबंधित विभागों के आला अधिकारियों से लेकर स्थानीय स्तर तक कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिजली और जलकल विभाग के एक्सएन, एसडीओ और जेई ने मौके का निरीक्षण भी किया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि निरीक्षण के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कार्रवाई के नाम पर अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर के चले जाते हैं। सूत्रों से मिली बेहद चैंकाने वाली जानकारी के अनुसार, अधिकारी इस जानलेवा समस्या को ठीक करने के एवज में स्थानीय दुकानदारों से कथित तौर पर श्चढ़ावेश् (रिश्वत) की उम्मीद कर रहे हैं। यही वजह है कि जनता की जान को ताक पर रखकर इस काम को लटकाया जा रहा है।
कैसरबाग जैसे व्यस्ततम इलाके में अगर यह ट्रांसफार्मर गिरता है या पानी में करंट फैलता है, तो जान-माल का एक ऐसा बड़ा नुकसान होगा जिसकी भरपाई नामुमकिन होगी। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद शासन-प्रशासन इन श्कुंभकर्णी नींदश् में सोए अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और इस जानलेवा समस्या से स्थानीय लोगों को कब तक निजात मिलती है।
