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पीलीभीतः भगवान श्रीराम और हनुमान जी पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में पीलीभीत में फूटा आक्रोश


  • स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू
  • धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप, एसपी को दिया प्रार्थना पत्र
  • 29 जून को एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर करने की तैयारी

पीलीभीत। भगवान श्रीराम, राम मंदिर और भगवान हनुमान जी को लेकर पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के विरोध में पीलीभीत में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। माँ ज्वालामुखी चैरिटेबल ट्रस्ट ने इस मामले को करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा बताते हुए उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। ट्रस्ट की ओर से शनिवार को पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव को प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई है। साथ ही घोषणा की गई है कि यदि पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो सोमवार, 29 जून को स्पेशल जज (एमपी-एमएलए) कोर्ट, पीलीभीत में परिवाद दायर किया जाएगा।

माँ ज्वालामुखी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता नीलेश चतुर्वेदी ने बताया कि 23 जून को गाजीपुर जिले में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान श्रीराम, राम मंदिर तथा भगवान हनुमान जी को लेकर कथित रूप से अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनका आरोप है कि सार्वजनिक मंच से दिए गए इन बयानों में भगवान हनुमान जी के पौराणिक प्रसंगों का उपहास उड़ाया गया तथा उनके अस्तित्व पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें ष्मामूली सा बंदरष् कहकर संबोधित किया गया। इसके साथ ही भगवान श्रीराम और राम मंदिर को लेकर भी कथित रूप से अशोभनीय और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।नीलेश चतुर्वेदी का कहना है कि कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न समाचार चैनलों पर तेजी से प्रसारित हुए, जिसके बाद हिंदू समाज में व्यापक नाराजगी और आक्रोश व्याप्त हो गया। उनका आरोप है कि यह बयान किसी आवेश में नहीं बल्कि सुनियोजित तरीके से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान करने की मंशा से दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में वैमनस्य पैदा कर सकते हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी प्रभावित कर सकते हैं।ट्रस्ट की ओर से पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर भारतीय दंड संहिता और अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई की जाए। ट्रस्ट का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी धर्म, देवी-देवता अथवा धार्मिक प्रतीकों का अपमान करने का अधिकार नहीं है। कानून सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक आस्था का सम्मानपूर्वक पालन करने का अधिकार देता है और उसका उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है।नीलेश चतुर्वेदी ने कहा कि यदि पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो ट्रस्ट सोमवार, 29 जून को स्पेशल जज (एमपी-एमएलए) कोर्ट, पीलीभीत में विधिक प्रक्रिया के तहत परिवाद दाखिल करेगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं के सम्मान की लड़ाई है।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं का सार्वजनिक मंचों से अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों से भी इस विषय पर संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर एकजुट होने की अपील की। उनका कहना है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक आस्थाओं का उपहास उड़ाने का साहस न कर सके, इसके लिए दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है।

मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है और विभिन्न सामाजिक संगठनों की नजर अब पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि निर्धारित तिथि पर न्यायालय में परिवाद दायर किया जाता है तो यह मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ेगा।

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