पीलीभीत। भीषण गर्मी और उमस के बीच करीब 20 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से को शहर ही नही पूरे जनपद पूरनपुर ,माधोटांडा में लोगों का गुस्सा बिजली विभाग के खिलाफ खुलकर सामने आ गया। प्रदेश सरकार की निर्बाध बिजली आपूर्ति की घोषणाओं के बीच विभाग द्वारा मोहर्रम के अवसर पर जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति, जिसमें रात आठ बजे तक आपूर्ति सामान्य करने का दावा किया गया था, पूरी तरह विफल साबित हुई। शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे गुल हुई बिजली शनिवार सुबह लगभग नौ बजे तक भी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी। इससे हजारों उपभोक्ताओं को पूरी रात अंधेरे और उमस में गुजारनी पड़ी।
लंबे बिजली संकट के कारण शहर के अधिकांश इलाकों में पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित रही। इनवर्टर जवाब दे गए, मोबाइल फोन बंद होने लगे और छोटे बच्चों, बुजुर्गों तथा मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। कई मोहल्लों में लोग घरों से निकलकर खुले स्थानों पर बैठने को मजबूर हो गए। रातभर लोग बिजली आने का इंतजार करते रहे, लेकिन विभाग की ओर से कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई।गौरतलब है कि बिजली व्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी और गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार पहले भी कई बार समीक्षा बैठक कर चुके हैं। राज्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा था कि ष्आप कुछ भी करिए, आप मत सोइए, लेकिन जनता रात में चैन से सोनी चाहिए। इसी बात की तनख्वाह आप लोग लेते हैं।ष् इसके बावजूद विभागीय व्यवस्था पूरी तरह चरमराई दिखाई दी। हालात इतने बिगड़े कि नाराज नागरिकों का आक्रोश जिलाधिकारी आवास तक पहुंच गया और लोगों ने विरोध दर्ज कराया।
बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के व्हाट्सएप ग्रुपों में भी उपभोक्ताओं का गुस्सा साफ दिखाई दिया। लोगों ने लगातार संदेश भेजकर बिजली आपूर्ति बहाल करने और सही जानकारी देने की मांग की, लेकिन अधिकांश शिकायतों का कोई जवाब नहीं मिला। कई उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने की मांग दोहराई, जबकि कुछ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी।
मोहर्रम को देखते हुए विभाग ने रात आठ बजे तक बिजली व्यवस्था सामान्य करने का दावा किया था, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी शहर के कई हिस्सों में अंधेरा पसरा रहा। कहीं पूरी सप्लाई बंद रही तो कहीं एक या दो फेस की समस्या बनी रही। उपभोक्ता लगातार शिकायत करते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन रहे।
बढ़ते जनाक्रोश और संभावित हंगामे को देखते हुए नाकटादाना फीडर पर दो थानों की पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। इससे साफ है कि बिजली संकट ने कानून-व्यवस्था की स्थिति तक प्रभावित कर दी थी। लोगों का कहना था कि यदि विभाग समय पर सही जानकारी देता और आपूर्ति बहाल करने के लिए प्रभावी प्रयास करता तो ऐसी नौबत नहीं आती।
अब शहरवासी पूछ रहे हैं कि जब रात आठ बजे तक बिजली देने का वादा किया गया था तो वह पूरा क्यों नहीं हुआ? लगभग 20 घंटे तक शहर अंधेरे में क्यों डूबा रहा? जिलाधिकारी और राज्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों का पालन क्यों नहीं हुआ? क्या इस गंभीर लापरवाही के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी या मामला केवल जांच तक सीमित रह जाएगा?
बिजली संकट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी बैठकों में दिए जाने वाले निर्देश और जमीनी स्तर पर उनकी पालना के बीच आखिर इतनी बड़ी खाई क्यों है। अब शहरवासियों की मांग है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि लापरवाह अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई कर बिजली व्यवस्था को स्थायी रूप से सुधारने के ठोस कदम उठाए जाएं।
