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लखनऊ : शासक ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी समाज सुधारक थे शाहूजी महाराज - रामचन्द्र पटेल


लखनऊ। विधान केसरी संवाददाता बॉबी लॉरेंस सामाजिक न्याय, समानता एवं आरक्षण व्यवस्था के जनक, महान समाज सुधारक राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर छत्रपति शाहूजी महाराज स्मृति मंच एवं केजीएमयू परिवार के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के मुख्य द्वार पर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज की प्रतिमा स्थल पर भव्य जन्मदिवस समारोह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रामचन्द्र पटेल ने कहा कि शाहूजी महाराज केवल एक शासक नहीं, बल्कि दूरदर्शी समाज सुधारक थे। उन्होंने जातिगत भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संघर्ष करते हुए समतामूलक समाज की नींव रखने का कार्य किया। महिला शिक्षा, सामाजिक समरसता और मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।पदमश्री प्रो० एस०एन० कुरील ने कहा कि शाहूजी महाराज ने वर्ष 1902 में आरक्षण के माध्यम से सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक पहल की थी। यही कारण है कि उन्हें भारत में आरक्षण व्यवस्था का जनक माना जाता है।पूर्व आई०पी०एस० डा० बी० पी० अशोक ने कहा कि शाहूजी महाराज ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम मानते हुए गरीब एवं पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार किया। उनके प्रयासों से समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ।डी०के० वर्मा, संयुक्त निदेशक ने कहा कि शाहूजी महाराज का दृष्टिकोण किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उन्होंने शिक्षा, कृषि और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। उनके द्वारा स्थापित विद्यालयों, छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों का लाभ सभी जातियों एवं समुदायों के लोगों को मिला।आर०आर० जैसवार, लोकपाल लखनऊ ने कहा कि शाहूजी महाराज ने उस दौर में महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया जब समाज में महिलाओं की शिक्षा को लेकर अनेक रूढ़िवादी बाधाएं मौजूद थीं। उन्होंने बालिकाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना कराई तथा महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए।प्रो० मनोज कुमार ने कहा कि शाहूजी महाराज सामाजिक समरसता के प्रबल समर्थक थे उन्होंने योग्य और प्रतिभाशाली व्यक्तियों को आगे बढ़ाने की नीति अपनाई तथा प्रशासन को अधिक जनोन्मुखी बनाने के लिए अनेक सुधार किए।प्रो० संतोश कुमार ने कहा कि शाहूजी महाराज जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की भावना का विरोध करते हुए समाज में भाईचारे और समानता का संदेश दिया। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ा हो।उक्त कार्यक्रम का शुभारम्भ भंते दिपांकर दीप जी द्वारा बुद्ध बंदना के साथ किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया एवं समाज में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रो० सुरेश कुमार, प्रो० मनोज कुमार, प्रो० नईम अहमद, प्रदीप गंगवार, दयासागर बौद्ध, प्रज्ञानंद उपासक, हरीशचन्द्रा, नरेश पाल, अनूप कन्नौजिया, आदि लोगों को प्रसस्ती पत्र देकर सम्मानित किया गया एवं उक्त कार्यक्रम का संचालन प्रो० हरीराम ने किया।

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